जीवामृत के उपयोग से किसान अभय सिंह की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता हुई खत्म

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कृषि भूमि में जीवामृत का उपयोग करके भूमि की उर्वरा शक्ति एवं फसल उत्पादन बढ़ा रहे हैं किसान श्री अभय सिंह

 सीहोर/ रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के निरंतर प्रयोग से भूमि की घटती उर्वरा शक्ति को रोकने और कृषि भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए सरकार द्वारा किसानों को अपनी कृषि भूमि पर जीवामृत के प्रयोग के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को कृषि विभाग द्वारा सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि किसान कृषि के दौरान जीवामृत के प्रयोग की ओर अग्रसर हों।  दरअसल जीवामृत एक प्राकृतिक (जैविक) खाद है, जो खेती में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और फसलों की अच्छी पैदावार के लिए उपयोग किया जाता है। यह पूरी तरह देसी तरीकों से घर पर ही बनाया जाता है। जीवामृत बनाने के लिए गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन, थोड़ी मिट्टी पानी का उपयोग किया जाता है। इन सभी चीजों को मिलाकर एक घोल बनाया जाता है और उसे कुछ दिन तक छोड़ दिया जाता है। फिर उसे फसलों की जड़ों के पास या छिड़काव के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व, अच्छे बैक्टीरिया और मिट्टी में उर्वरा शक्ति बढ़ाता है। जीवामृत बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसानों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, सब्सिडी एवं अनुदान दिया जाता है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिक किसानों के खेतों पर प्रयोग करके दिखाते हैं कि कैसे जीवामृत फसल की गुणवत्ता को बढ़ाता है।  सीहोर जिले के ग्राम सालीखेड़ा निवासी किसान श्री अभय सिंह ने भी अपनी कृषि भूमि पर जीवामृत का उपयोग किया है। जिसके बहुत ही सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। किसान श्री अभय सिंह ने बताया कि खेती में लगातार रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से उनकी ज़मीन की उर्वरा शक्ति घटती जा रही थी। फसलें भी अब पहले जैसी अच्छी नहीं होती थीं। लागत बढ़ती जा रही थी और आमदनी घटती जा रही थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत जीवामृत के बारे में पता चला। उन्हें जानकारी मिली की कृषि विभाग द्वारा जीवामृत बनाने के लिए किसानों को सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके पश्चात किसान श्री अभयसिंह ने जीवामृत बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया और कृषि विभाग से  सहायता प्राप्त कर अपने खेत पर जीवामृत की यूनिट स्थापित कर देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी से जीवामृत तैयार किया और नियमित रूप से फसलों में इसका छिड़काव और सिंचाई के समय प्रयोग शुरू किया। किसान श्री अभयसिंह ने बताया कि जीवमृत का उपयोग करने से उनके खेत की मिट्टी की गुणवत्ता सुधरने लगी है, और फसल का उत्पादन भी बढ़ गया है। जीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई, जिससे कृषि की लागत में भी कमी आई। आज किसान श्री अभयसिंह अन्य किसानों को भी जीवामृत बनाने और उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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