एक विधायक को ज्ञापन देने के बाद धरना देने की चेतावनी देना पड़े, एक ने धरना दे ही दिया

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प्रशासन द्वारा कुछ तो गड़बड़ है-

 प्रशासन की मनमानी विधायकों को भी नहीं दी जा रही तबज्जो, आम जनता का क्या हाल होगा? समझाा जा सकता है

अफसरों की मनमानी, घमंड व एटिट्यूट को कुछ तो कम किया जाना अावश्यक है

नर्मदापुरम। सोहागपुर विधायक विजय पाल सिंह को जनहित की मांग के लिए आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा। वहीं दो दिन पूर्व नर्मदापुरम के विधायक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा काे जनहित के लिए ही ज्ञापन देना पड़ा, इतना ही नहीं उन्हें यह तक कहना पड़ा कि यदि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करना पड़ेगा तो करेंगे। इससे सिद्ध हो रहा है कि जिले में प्रशासनिक मनमानी के चलतेे विधायकों तक को तवज्जो नहीं दी जा रही है। तब आम नागरिकों की क्या विसात है। यह समझा जा सकता है। विधायकों को ऐसा ही कुछ करना पड़ेगा क्योंकि वास्तव में नौकरशाही बहुत हावी हो चुकी है। उसकी मनमानी बढती जा रही है। जिले में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं। सड़कों की हालत खराब हो रही है। हर कहीं हर दिन जाम लग रहा है। व्यवस्थाओं के नाम पर सरकार के नौकर जिन्हें अधिकारी का तमगा दिया जाता है। अच्छा खासा वेतन, बंगला, कार नौकर चाकर, सब कुछ सरकार की ओर से मिल रहा है। फिर भी जोे कार्य करने चाहिए वह नहीं करके दादागिरी दिखाई जा रही है। जनप्रतिनिधि जिसमें भी विधायक स्तर के नेताओं के निर्देशों पर उनके पत्रों पर उनके कहने पर जनहित से जुड़े मुद्दों को तवज्जों नहीं दे रहे हों तो फिर इसे बेलगाम नौकरशाही नहीं तो और क्या कहा जाए। इनको इतना घमंड कहां से आ जाता है। इतनी मनमानी पर क्यों उतर रहे हैंं इनके एटिट्यूट को कुछ तो कम किया जाना चाहिए।

सोहागपुर विधायक की मांग

रामपुर मरोडा मार्ग को हाई -वे से जोड़ने के लिए ग्रामिण जन बहुत दिनों से मांग कर रहे हैं। सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने भी एनएचएआई अधिकारीयों को पत्र लिखें किंतु उनकी मनमानी के कारण समस्या का समाधान नहीं निकलने पर विधायक को स्थानीय ग्राम वासियों और भाजपा पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सांकेतिक चक्का जाम कर धरना प्रदर्शन को बाध्य होना पड़ा है। सत्ता में रहने के बाद अधिकारियों की इतनी मनमानी जनहित के कार्य में ठीक नहीं है।

सर सर कहके चढ़ा लिया है सिर पर

अनेक अधिकारियों को सर सर कहके तथा जितने वे मान सम्मान के शब्दों के हकदार नहीं है उतना उनको मान सम्मान देेकर सिर पर चढ़ाने का नतीजा यह है कि कुछ छुटभैये अधिकारी भी जरूरत से ज्यादा एटिट्यूट बताने लगते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि वे हैं वास्तव में सरकारी नौकर हैं, लेकिन कुछ अधिकार पाकर जनता पर ही रौब दिखाने से बाज नहीं आते ऐसे लोगों को यहां से दूर झाबुआ या ऐसी जगह भेजा जाना चाहिए जहां पर वहां की जनता इलाज करना जानती हो। यहां तो नर्मदा जी का पानी शीतल व ठंडा होने से तथा शालीनता से पेश आते हैं। इसका नाजायज फायदा ये सरकारी नौकर उठा रहे हैं।

विधायक भी चढ़ा लेते हैं सिर पर

देखने में आता है कि अनेक कार्यक्रमों में छोटे छोटे अधिकारी भी विधायकों के साथ मंच पर बैठने की हिमाकत करते हैं। फिर मंच से विधायक भी सज्जनतावस उन्हें सर सर कहते देखे जाते हैं। इस कारण भी ऐसे छोटी मानसिकता के लोग सर पर चढ़ जाते हैं। जनता के कार्यों में अढंगे डालकर परेशान करते हैं। जनता वास्तव में बहुत परेशान हैं।

जनप्रतिनिधियों को होना पड़ेगा कड़क

यदि विधायक ज्ञापन दे रहे हैं धरना प्रदर्शन करने का निर्णय ले रहे हैं। यह जनहित में अच्छे कार्य कहे जा सकते हैं। जनप्रतिधियों की जागरूकता कही जाएगी। इसके साथ ही यह भी ध्यान देने की बात है कि जितने भी जनप्रतिनिधि हैं उनको इन सरकारी नौकरों के सामने कड़क होने की जरूरत है। उन्हेंं जरूरत से ज्यादा सिर पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।

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