++++ राष्ट्रकवि माखन लाल चतुर्वेदी की जयंती पर विशेष ++++
साहित्य और स्वतंतत्रता सेनानी के रूप में नर्मदांचल का नाम रोशन किया माखन दादा ने
राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी माखन दादा से प्रभावित होकर आए थे उनकी जन्म स्थली पर
बलराम शर्मा,
साहित्यकार, शिक्षक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में राष्ट्रकवि पं माखनलाल चतुर्वेदी ने नर्मदांचल ही नहीं भारत का नाम रोशन किया। माखन दादा के कार्यों से प्रभावित होकर महात्मा गांधी दादा की जन्म स्थली बाबई आए थे। माखन दादा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। दादा स्वत्रंतत्रा संग्राम आंदोलन के दौरान 12 बार जेल गए उन्होंने जेल में ही पुष्प की अभिलाषा नामक कविता लिखी जो उनकी प्रसिद्ध रचना है। उनका बचपन बाबई में ही बीता है। युवावस्था में दादा खंडवा पहुंचे जहां पर उन्होंने शिक्षक का कार्य किया उसके कुछ समय बाद ही पत्रकारिता से जुड़ गए थे। पत्रकारिता करते हुए ही उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया। हिमकिरीटनी जैसी उत्कृष्ट काव्य कृति ने उन्हें अनेक पुरूष्कार दिलवाए हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब इटारसी आए थे तब उन्होंने इटारसी में कहा था कि मुझे माखनलाल के जन्म स्थान बाबई जाना है। बापू बाबई आए थे और सभा की थी।
दादा ने हिरनखेड़ा को बनाया था कर्मस्थली
खोला था स्कूल, स्वतंत्रता संग्र्राम सेनानियों को मिलता प्रशिक्षण
एक भारतीय आत्मा के नाम से विभूषित भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में माखन दादा का नाम प्रमुख हैं। महात्मा गांधी सहित तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उन्हें बहुत सम्मान देते थे। उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। नर्मदापुरम जिले के बाबई में जन्मे चतुर्वेदीजी के नाम से उस नगर का नाम माखन नगर हो गया है। दादा की जन्म स्थली माखन नगर थी। लेकिन कर्म स्थली के रूप में उन्होंने हिरनखेड़ा को चुना था। यह बात हिरनखेड़ा गांव के अनेक लोग कहते हैं। सबसे खास बात यह है कि जिस स्थान पर वे कुछ वर्ष रहे उसका नाम स्वराज रखा गया था। जिसे गांव का बच्चा बच्चा भी स्वराज के नाम से जानता है।
हिरनखेड़ा गांव के लोग कहते हैं दादा ने यहां पर एक स्कूल खोला था जिसका नाम था सेवा सदन विद्यालय। यहां पर आसपास के गांवों के बच्चे भी पढ़ने आते थे। उसी दौरान आजादी की जंग शुरू हो गई थी। स्कूल के पास का कुछ हिस्सा उस समय के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शरण स्थली के साथ ही प्रशिक्षण के काम भी आता था। सेनानियों की गुप्त बैठकें भी यहीं पर होती थी। दादा विद्यार्थियों के साथ ही सेनानियों को देश प्रेम का पाठ पढ़ाते थे। यहीं पर काव्य रचना भी करते थे। जिस स्थान पर वह रहते थे उस पूरे क्षेत्र को स्वराज का नाम दिया गया था।
गांव के लोग बताते हैं कि चतुर्वेदीजी ने हिरनखेड़ा के प्राचीन तालाब के किनारे स्वराज्य आश्रम बनाया था। यहीं पर हाई स्कूल शुरू किया था साथ ही यहां पर आवासीय सुविधा भी छात्रों के लिए थी जिसमें कि बाहर कि छात्र यहीं पर रुकते थे। इन्हीं छात्रों में से एक छात्र स्व. बृजलाल वर्मा ने चलकर भारत सरकार में संचार मंत्री हुए।
यहां चतुर्वेदीजी के पास स्वतंत्रता संग्राम के अनेक यशस्वी नेता भूमिगत रहकर आंदोलन चलाते थे इनमें से एक नाम पंडित सुंदरलाल तपस्वी का है जिन्हें गिरपफतार करने के लिए अंग्रेज सरकार ने बड़ा ईनाम रखा था। पंडित सुंदरलाल तपस्वी ने भारत में अंग्रेजी राज ग्रंथ की रचना की थी जिसके चार भाग प्रकाशित हुए थे और जिन्हें अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था। ऐसे ही यहां माखनलालजी के भाई हरिप्रसादजी भी इसी स्कूल में अध्यापक रहे थे जो बाद में श्यामा प्रसाद शुक्ल के मंत्रीमंडल में मंत्री रहे।
दादा के नेतृत्व में यहां स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन की अनेक गुप्त बैठकें होती रही। विशेष बात यह थी कि दादा के भाईयों जिनमें स्वर्गीय पं रामदयाल चतुर्वेदी, ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने भी अपना पूर्ण सहयोग दिया। जब आंदोलन तेज गति पकड़ चुका था तब दादा यहां से खंडवा की ओर चले गए थे। जहां से कर्मवीर का प्रकाशन शुरू किया।
दादा के नाम पर शासन ने दिया है ध्यान
मप्र शासन ने लोगों की मांगों पर ध्यान देते हुए दादा के नाम से उनकी जन्म स्थली बाबई का नामकरण किया है। बाबई का नाम माखन नगर करने की अधिसूचना 6 फरवरी 2022 को नर्मदा जयंती से दो दिन पूर्व होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम करने के साथ ही बाबई का नाम माखननगर किया गया था।
दादा के नाम पर हाईस्कूल है
दादा के नाम पर हिरनखेड़ा में स्वराज भवन का तो कोई नाम निशान नहीं बचा है। उनके नाम पर गांव में दूसरी जगह माखनलाल चतुर्वेदी हाईस्कूल जरूर संचालित हो रहा है। गांव के लोगों के लोगों की इच्छा है कि यहां पर दादा के नाम का कोई स्मारक बनना चाहिए।
माखन कुंज की भूमि का हटना चाहिए अतिक्रमण,
प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान 10 में से बची 8 एकड़ भूमि वर्ष 1991-92 में शासन ने तवा पुल के दोनों और नर्मदांचल के दोनों राष्ट्रकवि माखन लाल चतुर्वेदी और भवानी प्रसाद मिश्र के नाम 10-10 एकड़ भूमि पर कुंज बनाने की योजना बनाई थी। तवा के इस भवानी कुंज के नाम पर सिर्फ नर्सरी ही है। लेकिन उस पार की भूमि पर अतिक्रमण हो गया। जिससे वहां पर नर्सरी तक नहीं बन सकी। कुछ भूमि अभी भी है लेकिन शासन प्रशासन का ध्यान ही नहीं है।
पूर्व विधायक स्व. मधुकर राव हरणे ने ध्यान देकर दोनो कुंज बनवाने व शासन से भूमि आवंटित कराने की पहल की थी। लेकिन एक कुंज बन गया एक रह गया। तत्कालीन प्रशासन ने दोनों ओर माखन कुंज और भवानी कुंज के नाम से बोर्ड लगा दिए थे। जो लंबे समय तक याद दिलाते रहे। फिर भी प्रशासन ने अनदेखी की।
-व्यवस्थित संग्रहालय हो-
देश के वरिष्ठतम साहित्यकार की जन्म स्थली माखननगर बाबई में दादा के नाम का एक व्यवस्थित संग्रहालय होना चाहिए। उन्होंने देश की आजादी में गांधी जी के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए जेल गए। उनकी श्रेष्ठ रचनाओं में से पुष्प की अभिलाषा का यह शताब्दी वर्ष है। यह कविता उन्होंने 1921 में जेल में ही लिखी थी।
कीर्ति प्रदीप वर्मा साहित्यकार माखननगर बाबई






