वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए बजट में मध्यम वर्ग के लिए राहत की बड़ी सौगात दी है। यह कि 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कर नहीं लगेगा जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बच सकेगा। फलस्वरूप घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक गतिविधियों में रवानी आने से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वित्त मंत्री ने शनिवार को लोक सभा में वर्ष 2025-26 का आम बजट पेश किया जो उनका लगातार आठवां बजट रहा, जो कीर्तिमान है। इस राहत से करीब एक करोड़ लोग आयकर के दायरे से बाहर हो जाएंगे। बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा बढ़ाने समेत अगली पीढ़ी के सुधारों को तेज करने का भी प्रस्ताव है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम बजट को ऐतिहासिक’ करार देते हुए कहा है कि यह हर भारतीय के सपनों को पूरा करेगा, विकसित भारत के मिशन को आगे ले जाएगा और विकास, निवेश और उपभोग को कई गुना बढ़ाएगा’। बेशक, बजट में जिस प्रकार से आयकर से राहत दी गई है, वह बाकी सभी बजट प्रावधानों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण दिखलाई पड़ रही है। हालांकि हर बजटीय प्रावधान खासे विमर्श के बाद किया जाता है।
लेकिन आयकर में राहत महत्त्वपूर्ण है क्यों कि अरसे से इस बाबत मांग की जा रही थी। अब यह राहत मिली है, तो इसे कुछ लोग चुनाव के मद्देनजर किया गया बदलाव करार दे रहे हैं। इस साल के आखिर में बिहार और इसी फरवरी में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हैं। बिहार के लिए भी पैकेज घोषित किया है, और आयकर में राहत से एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली के 85 प्रतिशत करदाताओं को अब आयकर नहीं देना पड़ेगा। बहरहाल, आम बजट से चुनावी से इतर अनेक लाभ मिलने तय हैं।
महंगाई कम करने के साथ ही बजट रोजगार सृजन में सहायक होगा। रक्षा क्षेत्र और पूंजीगत व्यय में वृद्धि करने के साथ ही नियामक सुधारों पर बल दिया गया है। वरिष्ठ जन की एक लाख रुपये तक की ब्याज आय को कर-मुक्त रखा गया है, जो यकीनन सराहनीय है। परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए भी उत्साहजनक ऐलान है।
स्वास्थ्य क्षेत्र और ईवीएम से जुड़ खचरे के लिए भी खासा आवंटन है। वित्त मंत्री ने रेल बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और इस वर्ष भी पिछले वर्ष की भांति ही 2.52 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। बेशक, बजट की आलोचना करने के लिए तमाम तर्क गढ़े जा सकते हैं, लेकिन इतना तो कहना होगा कि बजट समाज के व्यापक वर्ग के हित में दिख रहा है।






