बाल विवाह के सामाजिक दुष्प्रभाव,विधिक जागरूकता कारण एवं निवारण पर हुई संगोष्ठी

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नर्मदापुरम/ शासकीय कन्या महाविद्यालय सिवनी मालवा में शासन के निर्देशानुसार समाजशास्त्र विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वाधान में बाल विवाह के सामाजिक दुष्प्रभाव,विधिक जागरूकता कारण एवं निवारण पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.उमेश कुमार धुर्वे ने की। इस कार्यक्रम में बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो.एस.के अग्रवाल शासकीय कुसुम स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने अपने विचार प्रस्तुति करते हुए उन्होंने बताया कि यूनिसेफ और यूएनएफपीए ने‘ग्लोबल प्रोग्राम टू एक्सीलरेट एक्शन टू एण्ड चाइल्ड मैरिज’के तहत हाथ मिलाया है,जहां पहली बार स्वास्थ्य शिक्षा,बाल संरक्षण,पोषण एवं जल व साफ-सफाई पर मौजूदा योजनाओं को एक सिरे में बांधकर बाल विवाह की समस्या को सर्वांगीण रूप से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम को जरूरी बताया। वक्ता डॉ.एस के झा ने बताया कि बाल विवाह बचपन खत्म कर देता है। बाल विवाह बच्‍चों की शिक्षा,स्‍वास्‍थ्‍य और संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर,बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता हैं। कार्यक्रम में रासेयो कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती काजल रतन,वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.बाऊ पटेल,श्री रजनीश जाटव महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ.टी टी एक्का सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र ने किया और आभार श्री मनोज कुमार प्रजापति ने व्यक्त किया।

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