एम्स भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था में कार्यरत 200 पूर्व सैनिकों को नौकरी से निकाला

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भोपाल (आरएनएस)। देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सुरक्षा व्यवस्था में कार्यरत 200 पूर्व सैनिकों को नौकरी से हटा दिया गया है। जिससे वे बेरोजगार हो गए हैं। इस फैसले से न केवल प्रभावित पूर्व सैनिकों में नाराजगी है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। नौकरी से हटाए गए पूर्व सैनिकों ने इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को पत्र लिखकर अपनी बहाली की मांग की है। इस मामले पर एम्स प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों का कॉन्ट्रैक्ट पीरियड समाप्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें हटा दिया गया है। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, यह एक नियमित प्रक्रिया है जिसमें कान्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद नई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नई एजेंसी ने पूर्व सैनिकों को दोबारा नियुक्त करने पर विचार क्यों नहीं किया। यहां मौजूद पूर्व सुरक्षाकर्मियों के अनुसार उनको मौखिक रूप से पिछले एक महीने से कहा जा रहा था कि उनका कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू हो जाएगा। यह कांट्रेक्ट जब 31 जनवरी को खत्म हो रहा था। उसी दिन दोपहर करीब डेढ़ बजे बताया गया कि कान्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं हो रहा है। जिसके चलते यह कर्मचारी कुछ नहीं कर सके। इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन से भोपाल के प्रेसिडेंट जगदीश सिंह बैस ने कहा कि 31 जनवरी को हमारे संज्ञान में आया कि एम्स में जो सेना के रिटायर्ड जवान काम कर रहे थे, उनको बिना किसी रीजन के निकाल दिया गया। हमने आनन-फानन में बैठक बुलाई। मैं कहना चाहता हूं कि जिस सैनिक ने भारत मां के लिए अपनी जवानी का समय बार्डर पर बिता दिया हो, उस सैनिक को रिटायर होने के बाद भी नौकरी से निकाल दिया गया है। एक तरफ तो गर्वमेंट कहती है कि अग्नीवीर को भी रिटायर होने के बाद नौकरी देंगे। मगर जो पूर्व में रिटायर्ड हैं उनको नौकरी देने में असमर्थ हो तो अग्निवीर को कैसे दोगे। सैनिक की बहुत अधिक इनकम नहीं होती है, घर चलाने में उसको हमेशा अलग से इनकम की जरूरत होती है। उसको सिक्योरिटी गार्ड के लिए सूटेबल माना जाता है। मगर अब यहां भी उनका भविष्य निश्चित नहीं है तो क्या कहूं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इन भूतपूर्व सैनिकों को दोबारा से नौकरी पर रखा जाए।

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