नई दिल्ली (ए.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम संविधान को जीते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में जो धाराएं हैं, एक स्पिरिट भी है। मोदी ने कहा कि संविधान को मजबूती देने के लिए संविधान की भावना को जीना पड़ता है। हम वो लोग हैं जो संविधान को जीते हैं। मोदी ने कहा कि 2014 में जब हम आए, तब मान्य विपक्ष नहीं था। उतने अंक लेकर भी कोई नहीं आया था। भारत के अनेक कानून ऐसे थे कि हमें पूरी स्वतंत्रता थी उस कानून के हिसाब से काम करने की। अनेक कमेटियां भी ऐसी थीं, जिसमें लिखा था विपक्ष के नेता उसमें आएंगे, लेकिन विपक्ष कोई था ही नहीं। प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि ये हमारा संविधान जीने का स्वभाव था, हमने तय किया कि भले मान्य विपक्ष नहीं होगा, लेकिन जो सबसे बड़े दल का नेता है, उसे मीटिंग्स में बुलाएंगे। उन्होंने कहा कि जब सत्ता सेवा बन जाए, तो राष्ट्र निर्माण होता है। जब सत्ता को विरासत बना दिया जाए, तो लोकतंत्र खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना को लेकर चलते हैं, हम जहर की राजनीति नहीं करते हैं। हम देश की एकता को सर्वोपरि रखते हैं और इसलिए सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाते हैं। जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि सात दशक तक जम्मू-कश्मीर-लद्दाख को संविधान के अधिकारों को अलग रखा गया। ये संविधान के साथ भी अन्याय था और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के साथ भी अन्याय था। हमने अनुच्छेद 370 की दीवार गिरा दी। अब जम्मू-कश्मीर-लद्दाख को देशवासियों को जो अधिकार हैं, वो अधिकर उन्हें मिल रहे हैं। हम संविधान के महात्म्य को जानते हैं। संविधान की भावना को जीते हैं, इसलिए ऐसे मजबूत निर्णय भी हम करते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जाति की बातें करना कुछ लोगों का फैशन बन गया है। पिछले 30 साल से सदन में आने वाले ओबीसी समाज के सांसद दलों के भेदभाव से ऊपर उठकर एक होकर मांग कर रहे थे कि ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा दिया जाए। जिन लोगों को आज जातिवाद में मलाई दिखती है, उन लोगों को उस समय ओबीसी की याद नहीं आई।








