शिव-शक्ति की साधना से मानव जीवन का कल्याण होता है-आचार्य पंडित चंद्रप्रकाश शास्त्री
सीहोर। भगवानशिव इस सृष्टि के परम सत्य हैं। भगवान शिव संहारक भी हैं और सभी प्राणियों के रक्षक भी है। भगवान शिव मृत्युंजय हैं, तो शक्ति काली, बगला, तारा और भुवनेश्वरी हैं। भगवान शिव पिता एवं शक्ति समस्त प्राणियों की माता हैं। भगवान शिव एवं माता शक्ति की कृपा से ही यह संसार संचालित है। उक्त विचार शहर के बढ़ियाखेड़ी स्थित जीवन वाटिका कालोनी में जारी पांच दिवसीय श्री शिव-शक्ति अनुष्ठान में आचार्य पंडित चंद्रप्रकाश शास्त्री ने कहे। वाटिका में पहले दिन धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। इसके अलावा महामृत्युंजय जाप, शिव पार्थिव पूजन और शिव अर्चना की गई। अनुष्ठान के द्वारा युवा कथा व्यास पंडित शिवम मिश्रा, पंडित शिव कुमार शास्त्री, पंडित रविकांत शास्त्री, पंडित जितेन्द्र शास्त्री और आशीष शास्त्री आदि शामिल थे।
आचार्य पंडित चंद्रप्रकाश शास्त्री ने कहा कि महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला खास मंत्र है। ये मंत्र ऋग्वेद और यजुर्वेद में भगवान शिव की स्तुती में लिखा है। रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करना चाहिए। जिससे हर तरह की परेशानी और रोग खत्म हो जाते हैं। वहीं अकाल मृत्यु का डर भी दूर होता है। इस मंत्र के जप से मनुष्य की सभी बाधाएं और परेशानियां खत्म हो जाती हैं। भगवान शिव प्राणदायक है और प्राण सभी प्राणियों को प्रिय है। प्राण की रक्षा केे लिए भगवान शिव की पूजा-अर्चन अनुष्ठान, मंत्र-पाठ, हवन-यज्ञ एवं दान-पुण्य की परंपरा चली रही है। शिव शक्ति की साधना से केवल अकाल मृत्यु पर विजय प्राप्त किया जा सकता है। अपितु बल, बुद्धि, विद्या एवं आयु को बढ़ाया और बुरे वक्त को टाला भी जा सकता है। शिव-शक्ति की साधना से मानव जीवन का कल्याण होता है। ईष्टजनों के वियोग, भाई-बंधुओं के विद्रोह, दोषारोपण, कलंक, उदासी, धनाभाव और कोर्ट-कचहरी के मसले हल होंगे।








