जबलपुर . मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय न्यायधीश डी डी बंसल की एकल पीठ ने जिला पंचायत ( डी आर डी ए ) प्रशासन , शहडोल में चपरासी के पद पर पदस्थ कर्मचारी के विरुद्ध सातवें वेतन मान के लाभ 1.1.2016 से गलत मानते हुए पात्रता 01.04.2018 से मानते हुए आधिक्य भुगतान हेतु वसूली आदेश व अधिक राशि की वसूली याचिकाकर्ता के वेतन से किये जाने को चुनौती देने वाली याचिका में म. प्र. शासन के पंचायत विभाग व जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से जबाव तलब किया है . उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता सुरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने याचिका प्रस्तुत करते हुए तथ्य प्रस्तुत किये कि याचिकाकर्ता डी आर डी ए का कर्मचारी है जो जिला पंचायत शहडोल के डी आर डी ए कोष्ठ में पदस्थ है. राज्य शासन ने अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन मान का लाभ का लाभ वर्ष 2016 से देने का निर्णय दिया और इसी आदेश के तारतम्य में विधिवत याचिकाकर्ता को भी सातवें वेतनमान का लाभ वर्ष 2016 से दिया गया. किन्तु अचानक 8 वर्षों बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी शहडोल ने मनमाना आदेश पारित कर याचिकाकर्ता को उक्त लाभ की पात्रता वर्ष 2018 से मानते हुए वसूली का आदेश जारी कर दिया जबकि डी आर डी ए के कर्मचारियों को उनकी सेवा शर्तों के अनुसार राज्य शासन के कर्मचारी की भांति सभी सेवा लाभ पाने का हक़ है . इस सम्बन्ध में म. प्र. शासन ने समय समय पर अनेक आदेश भी जारी किये हुए हैं. इसके अलावा उक्त वसूली कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के विरुद्ध है जिसमें यह कहा गया है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से वसूली नहीं की जा सकती तथा जहाँ कथित आधिक्य राशि वसूली आदेश जारी होने के पांच वर्ष पूर्व से किया गया है और वसूली आदेश कठोर व मनमाना है . याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी , आनंद शुक्ला , आशीष कुमार तिवारी , विनीत टेहेनगुरिया पैरवी कर रहे हैं.








