सीहोर। सिद्धपुर अशासकीय शिक्षक संगठन के आह्वान पर गुरुवार को अशासकीय स्कूलों के विभिन्न संगठनों एमपी बोर्ड के पहली से आठवीं कक्षा तक के प्राइवेट स्कूल बंद हैं। मान्यता के नियम में रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट की शर्त के विरोध में बंद बुलाया गया है। बंद का असर देखा जा गया। अशासकीय स्कूलों के विभिन्न संगठनों द्वारा कक्षा 8 वीं तक के स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण में नए नियमों के कारण जा रही समस्याओं के निराकरण एक दिवसीय बंद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिले के अधिकतर स्कूल बंद रहे। सीबीएसई स्कूलों द्वारा भी बंद का समर्थन किया गया। संगठन के अध्यक्ष श्री मिश्रा का कहना है कि हमारी चार सूत्रीय मांग है। जिसमें 1 रजिस्ट्रर्ड किरायानामे की शर्त समाप्त की जाए। 2. एफडी की अनिवार्यता समाप्त की जाए। 3. मान्यता नवीनीकरण शुल्क समास किया जाए। 4. मान्यता नवीनीकरण हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी के समान 5 वर्षों के लिए किया जाए। संगठन के जिलाध्यक्ष अजय मिश्रा ब्लाक अध्यक्ष सीहोर जीएस कुंतल, इछावर ब्लाक अध्यक्ष सतीश शर्मा, आष्टा ब्लाक अध्यक्ष भोलू सिंह ठाकुर, श्यामपुर ब्लाक अध्यक्ष धर्मेंद्र श्रीवास्तव, जिला सचिव राजेश सिंह भदौरिया संहित चन्द्र भूषण बघेल, दीपक राठौर, शरद हुण्डेत, जयंत दासवानी, मनोज पाटीदार, धर्म पुरी, विजेन्द्र ठाकुर आदि संचालकों द्वारा बंद को सफल बनाने पर आभार व्यक्त किया, साथ ही शासन से समस्याओं का निराकरण शीघ्र किए जाने की मांग की गई। संगठन के जिलाध्यक्ष अजय मिश्रा ने बताया कि सरकार ने मान्यता के नियमों को बहुत जटिल बना दिया है, जिससे सबसे अधिक कठिनाई ग्रामीण जिलों में हो रही है। वहीं एफडी अमाउंट लिया जा रहा है। सत्र 2025-26 की मान्यता में कई स्कूलों के बंद होने की संभावना है। स्कूल बंद होने से उनमें कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं और इससे जुड़े संस्थान भी प्रभावित होंगे। बच्चों की शिक्षा पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। वर्तमान में प्राइवेट स्कूलों से राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि पहले शिक्षा के महत्व को समझते हुए मान्यता नियमों को सरल रखा गया था। प्रदेश में ऐसे में सवा लाख से अधिक शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों के बेरोजगार होने की संभावना है।








