जबावदार तथाकथित अधिकारियों को परवाह नहीं, समस्याएं भुगत रहे हैं नागरिक
नर्मदापुरम। शहर के वरिष्ठ समाजसेवी, गणमान्य नागरिक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पं भवानी शंकर शर्मा अपने कर्तव्य को जिस नैतिकता और निर्भीकता के साथ अपने पत्राचार के माध्यम से उठाते हैं। यह उनका दायित्व भी है क्योंकि जब कोई प्रशासनिक अधिकारियों को डर के कारण मुख्य समस्या से अवगत नहीं करा पाता है तब ऐसे समय में पं भवानी शंकर शर्मा ने निश्चित तौर पर अनेक बार अपने फर्ज को अदा करने के लिए कलम उठाई है। यह अलग बात है कि जो जबावदार हैं तथा जिनका मूल कर्तव्य है कि स्वयंमेव ही जन समस्याओं का निराकरण करें। शासन के मुखिया भी चाहते हैं कि जन का कल्याण हो। जन की समस्याओं का निराकरण जल्द से जल्द हो। लेकिन ऐसे भी तथाकथित अधिकारी हैं जिन पर शहर के विशिष्ठ व्यक्ति जन हितेषी समस्याओं के प्रति लिखित में चिठ्ठी के माध्यम से उन्हें अवगत करा रहे हों तब भी वे नजरअंदाज कर रहे हों तब उनकी कर्तव्यनिष्ठा को क्या कहा जाए?
एसपी के बाद कलेक्टर को लिखनी पड़ी चिठ्ठी
कुछ समय पूर्व पं शर्मा ने एसपी को एक पत्र के माध्यम से शहर की यातायात व्यवस्था के संबंध में अवगत कराया था। लेकिन कोई असर नहीं हुआ। तब उन्हें कलेक्टर को अवगत कराने को मजबूर होना पड़ा। पं शर्मा ने गत दिवस जो पत्र कलेक्टर को प्रेषित किया है उसमें उन्होंने जनहित से जड़ी समस्या की जानकारी दी है। पत्र में लिखा है कि नगर में यातायात विशेषकर सेठानी घाट पर जाने का रास्ता निरंतर दुर्गम होता जा रहा है। स्थिति अत्यंत भयावह है। राजस्व, पुलिस, नगरपालिका का कोई ध्यान नहीं है। ना ही कोई जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं। बाजार क्षेत्र में नये बन रहे भवन निरंतर 2 से 3 फुट आगे बढ़ाकर बनाये जा रहे हैं। कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। आगे बढ़ी हुई दुकानों के आगे बैठने हेतु बेंचे रख दी जाती हैं फिर दुकानदार के तथा ग्राहक के वाहन दो से तीन लेयर में खड़े रहते हैं। शहर में इस तरह की अव्यवस्था से अराजकता की स्थिति बन रही है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए लिखा है कि ऑफिस आते वक्त बीच सड़क पर एक भोपाल की गाड़ी टेडी खडी थी उससे वाहन को सीधे खड़े करने को कहा जिससे हमारी गाड़ी निकल जाये तो वह लडने लगा। नपा अध्यक्ष पति का कहना है पुलिस सहयोग नहीं करती, पुलिस का कहना है यह राजस्व विभाग का काम है, राजस्व विभाग नगरपालिका की जबावदारी बताते है। कृपया ऐसी स्थिति में क्या करें। एक दूसरे पर टाल रहे हैं। जिससे शहर के नागरिक लोग परेशानी भुगतने को विवश हैं।
आगे पत्र में लिखा है कि ज्ञात हुआ है कि आप एवं पुलिस अधीक्षक कुछ दिन पूर्व नर्मदा जयंती की तैयारी तथा यातायात व्यवस्था देखने नर्मदा में बोट से आये थे एवं वही से निर्देश देकर चले गये। ऐसे में क्या समस्या समझ आई होगी? यह तो फाइल बिना खोले ऊपर से ही देख कर प्रकरण समझने जैसा हुआ। कुछ समय पूर्व हमने पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया था कि दोपहर एवं शाम के समय सरकारी वाहन छोड़कर अन्य गाड़ी से एक बार बाजार का भ्रमण कर लें तो सारी समस्या समझ जायेंगे। कृपया आप एवं पुलिस अधीक्षक एक बार सेठानी घाट तक अन्य वाहन से निरीक्षण करने का कष्ट करें। जिससे वास्तविक समस्या समझ आ सके। ऐसा किऐ जाने में कोई हर्ज भी नहीं है। इसलिए मुख्यालय के हित में ऐसा किया जाए तो निश्चित ही कुछ हद तक समस्या का निदान होने की संभावना बन सकेगी। पं शर्मा ने पत्र की प्रतिलिपि एसपी को भी दी है।
कौन सुधारेगा शहर की व्यवस्था?
जब जबावदार ही समस्या व अव्यवस्था को सुधारने पर ध्यन नहीं देेंगे तो फिर कौन सुधारेगा? वास्तव में देखा जाए तो शहर में पार्किंग की समस्या एक लाइलाज बीमारी जैसा है। अनेक बार बैठकें हो गई कागजों के पेट भर दिए अधिकारी आते और जाते बने। लेकिन समस्या वहीं की वहीं है। शहरवासी बेहद परेशान हैं। एक जिम्मेदार व्यक्ति होने का फर्ज पं शर्मा ने निभाया है लेकिन अधिकारियों ने इस समस्या को अभी भी गंभीरता से नहीं लिया है। यह बहुत गलत बात है।






