नर्मदापुरम/ सीएमएचओ डॉ दिनेश देहलवार एवं एपिडेमियोलॉजिस्ट आर एस चौहान ने बताया कि विगत दिनों चीन में गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी के प्रकरणों में वृद्धि के बारे में खबर है, जिसका मुख्य कारण ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस एचएमपीव्ही है। इस वायरस के संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे यह वायरस 2001 से ही अस्तित्व में है, जिसमें पहले कुछ प्रकरणों की पुष्टि नीदरलैंड में हुई थी। इसके बाद, विश्व के लगभग सभी हिस्सों में इस वायरस को पाया गया है। यह वायरस आमतौर पर माइल्ड श्वसन बीमारी का कारण बनता है, परन्तु कमजोर इम्युनिटी वाले रोगियों में गंभीर बीमारी विकसित हो सकती है। यह संक्रमण, संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क (खांसना, छींकना, हाथ मिलाना आदि) या दूषित सतह से फैलता है, और लक्षणों में खांसी, बहती नाक, बुखार, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ शामिल हो सकते हैं।
निवारक उपायों में हाथ धोना, खांसते समय शिष्टाचार का पालन करना, दूषित सतहों की सफाई करना और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क से बचना शामिल है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग/भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद वायरस अनुसंधान और निदान प्रयोगशालाओं द्वारा पिछले वर्ष (जनवरी से दिसंबर 2024) के दौरान आईएमपीव्ही के लिए परीक्षण किए गए लगभग 9500 सैम्पलों में से एचएमपीव्ही के लिए संभावना 3 प्रतिशत के करीब थी। सभी प्रकरणों में हल्की बीमारी थी और वह स्वस्थ्य हो गए।
बताया गया कि अभी तक, आईडीएसपी से उपलब्ध डाटा में तीव्र श्वसन बीमारी के प्रकरणों में किसी भी असामान्य वृद्धि दृष्टिगत नहीं है। सतर्कता बनाए रखने और अस्पताल में भर्ती ऐसे मरीजों के श्वसन सैम्पलों को परीक्षण के लिए चिन्हित संस्था को भेजा जाता है एवं निजी व शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों की रिपोर्टिंग की नियमित समीक्षा की जा रही है। नर्मदापुरम जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को एचएमपीव्ही वायरस के लक्षण एवं बचाव की जानकारी दी गई एवं आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।






