+++ गणतंत्र दिवस पर विशेष +++
अजादी के बाद से कई क्षेत्रों में र्कीतिमान गढ़े हैं, अभावों की जगह संसाधन बढें हैं
बलराम शर्मा,
नर्मदापुरम, आजादी के वीर जवानों ने अपना जीवन न्यौछावार करके आजादी दिलाई है। भारतवासियों का स्वतंत्रता से पूर्व और कुछ समय बाद तक अभावों और मुश्किल भरा जीवन था। विकास का पहिया आगे बड़ता गया और धीरे-धीरे नए कीर्तमान स्थापित होते गए। जिसकी गति अभी तक जारी है। सन् 1947 के बाद से अब तक भारत में बहुत कुछ घटित हुआ है। होता जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में, उद्योग धंधे के क्षेत्र में, सडकों के निर्माण, खेती किसानी, स्वास्थ्य सहित अन्य तमाम क्षेत्रों में विकास का पहिया बढ़ता जा रहा है। नर्मदांचल सहित देश में हरित क्रांति आई जिसके परिणाम स्वरूप खाद्यान्न की पैदावार में वृद्धि होना शुरू हो गई थी। अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सफलता अर्जित करने के साथ ही महामरियों के उन्मूलन की दिशा में भी बढ़ रहे हैं, और आईटी क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल होती जा रही। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर शहर के वरिष्ठजनों से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि भौतिक क्षेत्र में अमूलचूल परिर्वतन देखने को मिल रहा है।
-वरिष्ठजनों के विचार-
विकास की धारा वही
देश आजाद हुआ तब हम छोटे थे। उस समय की धुंधली सी यादें हैं। गुलामी से मुक्त होने पर खुशी का माहौल था। उस समय हर क्षेत्र में अभाव भरी जिंदगी थी। शिक्षा स्वास्थ्य के साथ ही खेती के कार्य भी सीमित थे। उस समय खाद्यान्य में गेहूं कम और ज्वार होती थी। कपड़े भी खादी के चलन में थे। अब बहुत विकास हो हुआ है। होता ही जा रहा है।
गोपीकांत घोष वरिष्ठ समाजसेवी
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केप्शन-पं गिरिमोहन गुरू सेवानिवृत्त शिक्षक
संसाधन का अभाव था
एक गांव से दूसरे गांव या कहीं अन्य स्थानों पर जाने के लिए पैदल चलना पड़ता था। बैलगाड़ी के बाद तांगे शुरू हुए थे। उनसे भी सीमित दायरे में आनाजाना हो पाता था। अब बाईक से लेकर नई-नई कार, बस आदि कई तरह के संसाधन हो गए जिससे एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से आना जाना हो जाता है। डिजीटल में भी आगे बढ़ रहे हैं।
गिरि मोहन गुरू सेवानिवृत्त शिक्षक
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आधुनिक भारत महान भारत
विकास क्षेत्र में भारत नए कीर्तिमान गढ़ता जा रहा है। पूर्व में जहां पुस्तक काफी,पेन तक नहीं मिल पाते थे। अब भारत डिजिटल इंडिया हो गया। सभी कार्य कम्प्युटर से तथा ऑनलाइन होने लगे है। राेजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही सड़कों, बंदरगाहों,हवाई अड्डों का निर्माण करवाकर देश में लगातार तरक्की हो रही है। आधुनिक भारत महान भारत हो गया है।
आरआर सोनी, पर्यावरणविद
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गांधी के प्रति आस्था
हमें जो आजादी मिली है वह महात्मा गांधी व उनके जैसे महान लोगों की दम पर मिली है। मेरा जन्म 1943 में हुआ था। मैं 7 वर्ष का था तभी से गांधी जी में आस्था थी। कुछ बढ़ा हुआ तभी से गांधी टोपी से प्रेम हो गया था। आज भी बिना टोपी के नहीं रह सकता। आज भी खादी प्यारी है।आजादी से पूर्व में परेशानियां ज्यादा थी। अब साधन बढ़ते जा रहे हैं
शंभूनाथ गुप्ता,गांधीवादी विचारक






