भोपाल(आरएनएस)। दुष्कर्म सहित अन्य गंभीर अपराधों में भी बेटियों और महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि लगभग 75 प्रतिशत मामलों में आरोपित बच सकते हैं। इसके पीछे बड़ी वजही यह है कि दबाव में पीडि़ताएं अपना बयान बदल लेती हैं। इसके अतिरिक्त साक्ष्य संकलन की कमजोरियां ओर विवेचना में देरी के चलते भी पीडि़ताओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। गृह विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2003 में गंभीर महिला अपराधों के संबंध में 7048 मामलों पर जिला एवं सत्र न्यायालयों में निर्णय हुआ। इनमें 5571 में आरोपित बरी हो गए। मात्र 1477 मामलों में ही सजा हो पाई। इसी तरह कुल 21 प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई है। इसी तरह से वर्ष 2024 में जनवरी से सितम्बर के बीच 4357 प्रकरणों में निर्णय हुआ। इसमें 835 में ही सजा हुई। जानकारी के मुताबिक 3522 मामलों में आरोपित बच गए यानी 19 प्रतिशत में ही दंड मिला। इनमें दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या, हत्या के प्रयास, एसिड अटैक, दहेज हत्या आदि मामले शामिल हैं।








