भोपाल, (आरएनएस)। पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने भरोसा दिलाया है कि उद्योगों का किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जो मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उनकी जांच विशेषज्ञों से करावाएंगे और उनका समाधान निकालेंगे। कोठारी ने एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज द्वारा पोलोग्राउंड कार्यालय में आयोजित खुला संवाद कार्यक्रम में बहुत सी बातें कहीं। बैठक का मकसद उद्योगों की समस्याएं समझाना और उन्हें हल करना है। डॉ. कोठारी ने पीथमपुर के 50 उद्योगों की शिकायतों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया, साथ ही विभागीय कामकाज को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू करने की बात कही। कोयले पर प्रतिबंध के मुद्दे पर उन्होंने वैकल्पिक समाधान ढूंढन का आश्वासन दिया। ईटीपी (गंदे पानी की सफाई) पाइप लाइन की समस्या को हल करने के लिए जिला उद्योग केंद्र और नगर निगम के साथ मिलकर समाधान किया जाएगा। बैठक में उद्योगपतियों ने खुलकर अपनी समस्याएं उनके सामने रखी। अध्यक्ष योगेश मेहता ने कहा कि कई बार छोटे ग्रीन कैटेगरी उद्योगों के आवेदनों को बिना कारण अस्वीकार कर दिया जाता है। कई मामलों मं उनकी आईडी भी लॉक कर दी जाती है, जिससे उद्योगों को परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि इन उद्योगों को सुधार का अवसर दिया जाए ओर उनकी फाइलों का समाधान तेज गति से हो। रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश मित्तल ने कहा कि कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। उन्होंने बताया कि यहां की रोलिंग मिलों में विभागीय मानकों के अनुसार बैक फिल्टर लगाए गए हैं, जिससे प्रदूषण फैलने की संभावना नहीं रहती। पूर्व अध्यक्ष प्रमोद डफरिया ने विभागीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने ओर ईज ऑफ ड्राइंग बिजनेस की तर्ज पर ऑनलाइन सिस्टम लागूु करने की मांग की। पालदा औद्योगिक क्षेत्र के सुरेश नुहाल ने कोर्ट केस का मुद्दा उठाया और राहत की मांग की। नवीन धूत में कहा कि प्रदूषण विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने के बावजूद उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। उद्योगपति अजय शर्मा ने सीएनजी की बढ़ती दरों पर चिंता जाहिर की। भुवनेश पांडे और अशोक जैन ने बताया कि उनके उत्पाद ऐसे हैं, जो विश्व में कहीं ओर नहीं बनते। फाउंड्री में कास्टिंग फर्नेस के लिए कोयले का उपयोग अनिवार्य है, क्योंकि सीएनजी इतनी क्षमता से काम नहीं करता। उन्होंने कहा कि उनकी यूनिट में सीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद उन्हें नोटिस देकर खानापूर्ति की जाती है। यह स्थिति उद्योगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं।








