नई दिल्ली ( आरएनएस)। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर भारत की संसदीय समिति मेटा को समन भेजेगी। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के बयान पर मेटा को 20 से 24 जनवरी के बीच समिति के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।भाजपा सांसद और कम्युनिकेशन-इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मंगलवार को कहा कि मेटा को गलत जानकारी फैलाने के लिए माफी मांगनी चाहिए। बता दें कि मार्क जुकरबर्ग ने10 जनवरी को एक पॉडकास्ट में कहा था, 2024 में कोविड के सरकारों का गिरना उनके प्रति जनता का अविश्वास दिखाता है।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, ‘भारत के चुनाव में 64 करोड़ लोग शामिल हुए थे। लोगों ने पीएम मोदी और एनडीए पर भरोसा किया। जुकरबर्ग को तथ्यों और विश्वसनीयता को कायम रखना चाहिए।’लोकसभा में सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, हमने तय किया है कि हम मेटा के लोगों को बुलाएंगे। जुकरबर्ग ने बयान देकर दिखाया है कि कोविड-19 के बाद सरकार के खिलाफ माहौल बनाया गया है, जिसमें उन्होंने भारत का भी जिक्र किया है। उनका यह बयान चिंताजनक है। इस तरह के बयान से पता चलता है कि वह देश के लोकतंत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं और दुनिया को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं कि भाजपा-एनडीए हार गई है। दुबे ने कहा कि ‘हमने तय किया है कि हम मेटा के लोगों को बुलाएंगे। उन्हें माफी मांगनी होगी, नहीं तो हमारी समिति कार्रवाई करेगी। हम समिति के सदस्यों से बात करेंगे और 20-24 जनवरी के बीच उन्हें उपस्थित होने के लिए कहेंगे।’








