भोपाल, (आरएनएस)। राजधानी में प्रदेश की पहली और देश की &5वीं माइक्राबायोलॉजी लैब का काम एक साल बाद पूरा नहीं हो सका है इस वजह से दूध, पानी, दही, मांस, पनीर व फल-सब्जियों सहित खाद्य पदार्थों में वायरस, बैक्टीरिया और फंगस की जांच निजी लैब से करवानी पड़ रही है, जहां से जांच रिपोर्ट आने में समय लगता है। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाती है। बता दें कि बैरसिया की इजगिरी पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र में मध्याह्न भोजन खाने से सात ब‘चे बीमार हो गए थे।, जिसके बाद खाद्य पदार्थ की जांच एक निजी लैब में करवाई गई थी।








