बैंक की मनमानी आमजनों पर भारी

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-प्रधानमंत्री आवास योजना में मिलने वाली सब्सिडी से रखा वंचित, सब्सिडी में स्टाम्प लगाने एवं फाईल के बहाने ऐंठे रूपये

भोपाल (निप्र)। बैंक की मनमानी का एक मामला फिर से सामने आया है जहां पत्रकार संदीप आत्मज श्री राजू का परिवार बैंक के चक्कर काट रहा है, बैंक की मनमानी का शिकार हुए पत्रकार द्वारा बताया गया कि उन्होंने गृहम हाउसिंग फाइनेंस जो कि पूर्व में पूनावाला हाउसिंग फायनैंस से बारह लाख का लोन लिय था साथ ही उन्हें लोन 9.5 प्रतिशत की दर से देने का भरोसा बैंक ब्रांच मैनेजर द्वारा दिया गया था लेकिन वेलकल लेटर में 11.50 प्रतिशत दर्ज होने से उनके द्वारा बैंक में विरोध दर्ज कराया गया था लेकिन ब्रांच मैनेजर द्वारा उन्हें भरोसा दिया गया कि एक वर्ष में ब्याज दर कम कर दी जायेगी लेकिन बैंक द्वारा ब्याज दर कम करने की बजाय उनकी ब्याज दर 15 प्रतिशत तक कर दी गई थी जिसके पश्चात उनके द्वारा आरबीआई गवर्नर सहित कई संस्थानों में बैंक की शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके पश्चात उनकी ब्याज दर वापस से 11.50 प्रतिशत कर दी गई एवं यह भरोसा दिया गया जल्द से जल्द आपकी ब्याज दर 11.50 से कम कर दी जायेगी। लेकिन बैंक द्वारा वापस से ब्याज दर कम करने की बजाय ब्याज दर बढा दी गई जिसके पश्चात उनके द्वारा एम.पी.नगर जोन-1 में स्थित गृहम हाउसिंग फाइनेंस के ऑफिस जाकर वहां के मैनेजर प्रतीक जी से बात की गई लेकिन वहां मौजूद मैनेजर द्वारा उनकी सहायता करने की बजाय उन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया कि ऑनलाईन शिकायत दर्ज करें इसमें हम कोई मदद नहीं कर सकते, साथ ही आवेदन लेने से मना कर दिया गया, जिसके पश्चात उनके द्वारा कई बार ईमेल के जरिये गृहम हाउसिंग फाइनेंस की ईमेल आईडी customercare@grihumhousing.com, head.customercare@grihumhousing.com एवं ग्राहक सेवा नंबर 1800-266-3204 में सम्पर्क किया गया लेकिन किसी भी प्रकार का कोई समाधान नहीं किया गया एवं साथ ही शिकायत का निराकरण करे बिना शिकायत को बंद कर दिया गया।
उनके द्वारा यह भी जानकारी दी गई की बैंक द्वारा जब उन्हें लोन दिया गया था तो प्रधानमंत्री द्वारा मिलने वाली सब्सिडी देने का भरोसा दिया गया था लेकिन बैंक द्वारा उनका आवेदन बैंक से आगे नहीं बढाया गया जिससे वह प्रधानमंत्री योजना अन्तर्गत मिलने वाली सब्सिडी से भी वंचित रह गये। बैंक के ऐसे आचरण एवं प्रताडऩा के चलते वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर है साथ ही उनके द्वारा दिये गये आवेदन में यह बताया गया कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है जिससे वह बैंक के अत्याधिक ब्याज दर के साथ किस्तों का भुगतान करने में असमर्थ है। बैंक की मनमानी के चलते उनके द्वारा फायनैंस मिनिस्टर, आरबीआई गवर्नर सहित राष्ट्रीय आवास बैंक सहित अन्य संस्थाओं में आवेदन प्रेषित करके कार्यवाही की मांग की गई है।

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