भोपाल, (आरएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में तत्कालीन डीआईजी जेल स्व. उमेश कुमार गांधी, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से संबंधित 4.68 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति कुर्क कर ली है। ईडी ने विशेष स्थापना पुलिस (लोकायुक्त) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। ईडी द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने उमेश कुमार गांधी के खिलाफ कार्रवाई की थी। गांधी पर अनुपातहीन संपत्ति का संचय करने के आरोप में जांच की गई, और लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने इस मामले में दो आरोप पत्र दाखिल किए हैं। पहला आरोप पत्र विशेष न्यायालय में पीसी एक्ट के तहत और दूसरा प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश भोपाल की अदालत में दायर किया गया है। इन मामलों में तत्कालीन जेल डीआईजी उमेश कुमार गांधी, अजय कुमार गांधी (तत्कालीन जेल प्रहरी, जिला जेल सीहोर), और अर्चना गांधी (उमेश कुमार गांधी की पत्नी) पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। इन पर 5.13 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले में यह कार्रवाई की गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आय से अधिक संपत्ति के स्रोत का पता लगाने के लिए पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत जांच की। जांच में सामने आया कि स्व. उमेश कुमार गांधी ने अपने नाम पर भारी मात्रा में चल-अचल संपत्ति अर्जित की थी। उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर कुल 4.68 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति मिली है। इसमें से 20 अचल संपत्तियों की पहचान की गई, जो मध्य प्रदेश के सागर, कटनी, सीहोर, भोपाल और इंदौर में स्थित हैं। इसके अलावा, बैंक खातों की शेष राशि, आभूषण, बीमा पॉलिसियां, म्यूचुअल फंड और किसान विकास पत्र जैसी चल संपत्तियां भी शामिल हैं। इन सभी को ईडी ने अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। भोपाल जेल के तत्कालीन डीआईजी उमेश कुमार गांधी के घर 12 साल पहले लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा था। उस समय उनके पास करीब 25 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने उनके दो भाइयों, अजय गांधी (सीहोर) और रामगोपाल गांधी (सागर) के घरों पर भी छापेमारी की थी। अजय गांधी के घर से लगभग 8 लाख रुपए की एफडी, 35 हजार रुपए नकद और लगभग 10 तोला सोने के आभूषण जब्त किए गए थे। बता दें कि, साल 2015 में लोकायुक्त ने कार्रवाई करते हुए उमेश कुमार गांधी को निलंबित कर दिया था। जिसमे उमेश कुमार गांधी को जेल भी जाना पड़ा था। कुछ साल पहले ही उमेश कुमार की कैंसर के कारण मौत हो चुकी है।








