विभाग और शासन की अनदेखी का शिकार हर्बल पार्क की नहीं सुधर रही दशा
बलराम शर्मा,
नर्मदापुरम। प्रदेश के दो पूर्व वन मंत्रियों की आपसी तनातनी के कारण और शासन प्रशासनिक उदासीनता के चलते शहर के समीप कलेक्ट्रेट से सटे हुए इस पार्क में 12 वर्ष पूर्व अच्छी खासी राैनक रहती थी। अब यहां पर व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। पूर्व में वन विभाग के द्वारा बनाए गए प्लान से पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने से नर्मदा तट के हरे भरे हर्बल पार्क में जैव विवधता, आकर्षक पाथ-वे, योगाभ्यास केंद्र, वन्य प्राणियों की शरण स्थली, औषधीय पौधों की नर्सरी, तितलियों का बसेरा, सहित वनस्पति प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी पार्क बनने और बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराने का सपना दिखाया गया था। लेकिन दुर्दशा को सुधारने की पहल नहीं हो सकी है।
आकर्षण का केंद्र रहा है हर्बल पार्क
12 वर्ष पूर्व नर्मदा तट का मनोहारी हर्बल पार्क लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। यहां पर वन्य प्राणियों का बसेरा तो है ही। स्कूली बच्चों को वनस्पतियों, वनोषधियों तथा अन्य आवश्यक जानकारियां तथा अनेक प्रतियोगिताएं की जाती थी। कुछ समय से सभी कुछ ठप है।
पूर्व में था शांतिवन बाद में हुआ हर्बल पार्क
हर्बल पार्क के संबंध में कलेक्ट्रेट से सेवा निवृत्त, पर्यावरण प्रेमी, समाजसेवी गोपीकांत घोष बताते हैं कि पूर्व में नजूल क्षेत्र में शहर के पशुओं के लिए चारागाह के रूप में करीब 30 एकड़ में फैला हुआ था। सुनसान एरिया था। इस क्षेत्र में श्मशान घाट था। यहां पर पुुरातत्ववेत्ता व इतिहासकार स्व. धर्मेद्र प्रसाद इस पार्क के बारे में चिंतित रहते थे उनका कहना था कि नर्मदा तट व सघन वृक्ष होने से बहुत शांति है। उनके कहने पर इसका नाम शांति वन रख दिया था। उन्होंने सलाह दी थी कि इसे हर्बल पार्क के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। तब मैंने इस पार्क के लिए तत्कालीन कलेक्ट्रर हरिरंजन राव से चर्चा की उन्होंने तुरंत वन विभाग से कहकर यहां पर औषधीय पौधे तैयार करने के लिए नजूल से वन विभाग काे हस्तांरित किया था। तब उन्होंने हर्बल पार्क बना दिया था।
जैव विविधता के रूप में विकसित
वन विभाग के उप वनपाल आरआर सोनी को जब इस पार्क का जिम्मा सौंपा गया ताे उन्होंने 2004 से लेकर 2009 तक अपनी सेवाएं देते हुए इस शांतिवन को हर्बल पार्क के रूप में विकसित कर दिया था। यहां पर जैवविधिता को विकसित किया गया। नर्मदा तट पर कंदब का पेड़, रूद्राक्ष सहित अन्य अनेक दुर्लभ पेड़ पौधों के साथ औषधीय पौधे तैयार होने लगे थे। इस पार्क को दो बार 2007-08 में जैव विविधता बोर्ड ने पुरूस्कृत किया है।
विकसित करने की बनी थी योजना
पूर्व वनमंत्री सरताज सिंह ने इस पार्क को नया स्वरूप देने की योजना बनाई थी हेैरीटेज व अन्य दुकाने बनाते हुए पार्क को विकसित करने की योजना बनाई ही थी। उसके कुछ दिनों बाद उन्हें वन मंत्री पद से हटाने के बाद लोनिवि मंत्री बना दिया था,और डॉ गोरीशंकर सेजवार वन मंत्री हो गए थे। दोनों मंत्री के बीच अनबन थी। डॉ सेजवार की पत्नी स्वास्थ्य विभाग की जेडी थी वे जिला अस्पताल का निरीक्षण करने आई थी तब वे हर्बल पार्क में बने विश्राम भवन में पहुंची तो वहां पर ताला लगा था। तब वन मंत्री शेजवार ने नाराज होकर हर्बल पार्क के सर्किट हाउस को तुड़वा दिया था। फिर हर्बल पार्क की ओर विभाग ने ध्यान देना ही बंद कर दिया। उसके बाद से उपेक्षित रहा है।
आर आर सोनी ने बताया कि वन विभाग का तत्कालीन अमले के बजह से 2005 से 2011 तक सफलता के आयाम छूता रहा और पुरष्कृत हुआ। यहां ’विश्व पृथ्वी सम्मेलन’ बिना बिघ्न के सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ था। अनेक आयोजन होते रहे हैं।






