लीला के दौरान आकाश मार्ग के द्रश्य ने दर्शको को किया आकर्षित
नर्मदापुरम। रामलीला समिति द्वारा सेठानी घाट के पास जारी रामलीला के दसवें दिन की लीला में सीता हरण की लीला का प्रदर्शन किया गया। इस लीला में दर्शाया गया कि वन में भगवान के निवास पंचवटी पर राक्षसी सूर्पनखा अपना वेश बदलकर आती है किंतु उसकी चाह पूरी ना होने पर श्रीराम के आदेश पर लक्ष्मण जी उसकी नाक कान काट देते हैं। उसकी सूचना वह अपने भाई खरदूषण को देती है लेकिन श्रीराम के द्वारा उनका वध होने के बाद फिर वह रावण के पास जाती है। और रावण को श्रीराम और सीता की पूरी जानकारी देती है तब रावण मारीच के पास जाता है। उससे कहता है कि तुम को स्वर्ण मृग बन कर पंचवटी जाना है और जैसे ही मारीच स्वर्ण मृग रूप धारण करके पंचवटी की ओर पहुंचता है। स्वर्ण मृग देखकर सीता जी अपने स्वामी श्रीराम को उसका वध करने के लिए आग्रह करती हैं तो श्रीराम मायावी स्वर्ण मृग का पीछा कर उसको एक ही बाण से धराशाई कर देते हैं लेकिन दूर जाकर मारीच हा लक्ष्मण हा लक्ष्मण चिल्लाता है यह सुनकर सीताजी चिंतित होती हैं और वीरव्रत धनुर्धर लक्ष्मण को श्रीराम की सहायता के लिए भेजतीं हैं। सहायता पर जाने के पूर्व लक्ष्मण पंचवटी के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा लक्ष्मण रेखा खींचकर वन में भाई की सहायता के लिए निकल पड़ते हैं। तभी साधु वेश में रावण सीता के पास पहुंचता है। सीता पहले सीमा रेखा से ही साधु रूपी रावण को भिक्षा देती है। जिसे रावण स्वीकार नहीं करता है जैसे ही रावण सीता से लक्ष्मण रेखा के पार आकर भिक्षा लेने को कहता है वैसे ही सीता का हरण करके अपने विमान में लेकर उड़ता है। सीता की चीख पुकार सुनकर सीता को जाते समय वृद्ध जटायु देख लेते हैं। रावण से उनका युद्ध होता है इस संघर्ष में रावण जटायु के पंख काट देते हैं महाबली जटायु से संघर्ष एवं उनका घायल होना बड़े मार्मिक द्श्य उत्पन्न करता है घायल जटायु श्रीराम को सीता की चीख.पुकार और सीता हरण की पूरी जानकारी देते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं।
सोमवार को सुग्रीव मित्रता और हनुमान का लंका गमन की लीला का आयोजन
साेमवार को सेठानी घाट के पास के स्टेज से ही सुग्रीव मित्रता और हनुमान का लंका गमन की लीला का आयोजन हुआ। इसके बाद अब मंगलवार को लंका दहन की लीला के बाद चार दिन की लीला दशहरा मैदान में सायं काल साढ़े 4 बजे से होगी।






