धान की तैयारी में जुट गए किसान, सोयाबीन के विकल्प के रूप में धान को ही सर्वोपरि मान रहे किसान
बलराम शर्मा।
नर्मदापुरम(होशंगाबाद), मानसूनी बारिश शुरू होते ही क्षेत्र का अन्नदाता किसान खरीफ मौसम की बोवनी की तैयारी में जुटने लगे हैं। नर्मदापुरम संभाग के तीनों जिलों में इस बार 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी होगी। जिसमें 2 लाख 67 हजार हेक्टेयर में धान लगाई जाएगी। खाद और बीज का प्रबंध करने के साथ ही अब धान के रौपे तैयार किए जा रहे हैं। इस बार भी 1121 किस्म की बासमती धान और क्रांति धान ही सबसे अधिक लगाई जाएगी।
सबसे अधिक नर्मदापुरम में
बीते वर्ष की तरह इस बार भी नर्मदापुरम जिले में सबसे अधिक धान 2 लाख 29 हजार में लगाई जाएगी। वहीं दूसरे नंबर पर बैतूल जिले में 35 हजार हेक्टेयर में और सबसे कम हरदा जिले में 3.50 हजार हेक्टेयर में ही धान की खेती की जाएगीं। नर्मदापुरम जिले के किसानों ने तो रौपा लगा दिया है। धान के गटा में पानी भराने के बाद धान लगना शुरू हो जाएगी।
सोयाबीन का विकल्प है धान
जिले में पूर्व में सबसे अधिक सोयाबीन की खेती होती थी लेकिन सोयाबीन की पैदावार बहुत कम होने तथा कीट व्याधि के कारण सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा सिद्ध होने लगी थी। इस कारण किसानों ने विकल्प के रूप में धान लगाना शुरू किया है। जिले के हर ब्लाक के गांव गांव में हर तरफ अब धान लगने लगी है।
किसानों की अपेक्षा
किसान हेमंत चौधरी, नरेंद्र पटेल, सुदीप पटेल, सुरेंद्र गौर और गणेश गौर का कहना है कि किसानों को हर बार की तरह इस बार भी धान सोयाबीन, मक्का सहित अन्य फसलों के उत्तम क्वालिटर के बीज और खाद की व्यवस्था समय पर हो जाए तो अच्छा रहेगा। दूसरी परेशानी यह है कि पूर्व में बासमती धान के दाम अच्छे मिल जाते थे लेकिन अब कम होते जा रहे हैं। जिससे लागत मूल्य निकल पाना मुश्किल होता है। इसलिए किसान सोचा विचारी कर रहा है।
इनका कहना है-
‘‘ मानसून की तेज बारिश के बाद किसान सोयाबीन और धान लगाने के साथ ही अन्य खरीफ फसलों की बोवनी में लग जाएंगे। उन्हें बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों के साथ ही विभाग के द्वारा भी अावश्यक तैयारियां की जा रही हैं। पूर्व की तुलना में इस बार ज्यादा खरीफ फसल की बोवनी हाेगी।
जेआर हेड़ाउ, उप संचालक कृषि नर्मदापुरम






