नई दिल्ली (आरएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पंचायती राज मंत्री ललन सिंह के एक बयान को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आशंका जताई है कि सरकार भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार कार्ड के बजाय मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य कर सकती है। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से करोड़ों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया को नहीं रोका गया तो इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को मताधिकार से वंचित करने के लिए किया जा सकता है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के मंत्री ने ऐलान किया है कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ आधार कार्ड के बजाय मतदाता पहचान पत्र के आधार पर तय होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है। उनके अनुसार, एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इनमें भाजपा के खिलाफ नाराजगी रखने वाले लोगों के नाम अधिक हो सकते हैं।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची एक निष्पक्ष चुनाव आयोग के नियंत्रण में होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के कर्मचारी ज्ञानेश कुमार के हाथों में है।उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी मतदाता सूची तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें भाजपा को हमेशा बहुमत मिलने की स्थिति बनी रहे। राहुल के अनुसार, यदि यही सूची सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आधार बन गई तो जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, वे न केवल मतदान के अधिकार से वंचित होंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ से भी दूर हो सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि शुरुआत में पंचायती राज मंत्रालय की योजनाओं को मतदाता पहचान पत्र से जोडऩे के बाद भविष्य में राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास, छात्रवृत्ति और आरक्षण जैसी सुविधाओं को भी इससे जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का विरोध करने वाले लोगों के नाम चुन-चुनकर मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। इससे उनका मतदान का अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ, दोनों प्रभावित होंगे। राहुल गांधी ने इसे केवल चुनाव में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों को छीनने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था लागू हुई तो जनता सरकार का चुनाव नहीं करेगी, बल्कि सरकार यह तय करेगी कि उसकी जनता कौन होगी। किसी गरीब की पेंशन उसके मतदाता पहचान पत्र की गुलाम नहीं हो सकती। मतदान करना नागरिक का अधिकार है, किसी सरकारी योजना का लाभ पाने की शर्त नहीं।
दरअसल, केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने 30 अक्टूबर को मंत्रालय की ओर से आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में लाभार्थियों को भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अब लाभार्थियों को भुगतान का आधार केवल आधार कार्ड नहीं रहेगा। इसके लिए बायोमेट्रिक पहचान और मतदाता पहचान पत्र का निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर इस्तेमाल किया जाएगा।
ललन सिंह ने कहा था कि आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं हर गली में उपलब्ध हैं। ऐसे में लाभार्थियों के भुगतान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उनकी बायोमेट्रिक पहचान और मतदाता पहचान पत्र के ईपीआईसी नंबर को आधार बनाया जाएगा।
मंत्री के इसी बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी ने इसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बढऩे के आसार हैं।








