कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट, एक महीने में मांगी रिपोर्ट

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नई दिल्ली, (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और कथित हिंसा के मामले में सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने उच्चस्तरीय जांच समिति (एचपीईसी) को पूरे घटनाक्रम की जांच कर एक महीने के भीतर पहली रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में पुलिस की ओर से लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री को भी शामिल करने को कहा गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि प्रदर्शन से संबंधित सभी पक्षों की ओर से प्रस्तुत जानकारी और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसमें पीडि़तों की ओर से समिति को सौंपी गई सामग्री भी शामिल होगी।
अदालत ने कहा कि समिति के समक्ष पहले से उपलब्ध सामग्री के आधार पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा जाए। इसके बाद प्राथमिकता वाले मुद्दों पर जांच पूरी कर एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की जाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि समिति को सौंपे गए अन्य विषयों के अलावा दो प्रमुख मुद्दों पर विशेष प्राथमिकता के साथ विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए 18 अगस्त को पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
अदालत ने समिति को विशेष रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा और उन्हें परेशान किए जाने के आरोपों की जांच करने को कहा था। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों की ओर से हुई कथित हिंसा और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भी पड़ताल करने का निर्देश दिया गया था।
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि जांच केवल प्रशासन या पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान प्रभावित हुए लोगों और पीडि़तों की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों, साक्ष्यों तथा अन्य सामग्री पर भी निष्पक्षता से विचार किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब जांच समिति को संबंधित पक्षों से जवाब लेकर पूरे घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को निर्धारित की गई है।
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