चुनाव आयोग का बड़ा फैसला : फॉर्म-6 से हटाया एसआईआर घोषणा का कॉलम, अब भरने होंगे अलग-अलग फॉर्म

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नई दिल्ली (आरएनएस)। भारतीय चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर अपने फैसले में एक बार फिर बदलाव किया है। आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से एसआईआर से संबंधित घोषणा वाले विवादित कॉलम को हटा दिया है। अब नए मतदाताओं को वोटर रजिस्ट्रेशन और एसआईआर की प्रक्रिया के लिए ईसीआईनेट पोर्टल पर अलग-अलग फॉर्म भरने होंगे। यह फैसला उन राज्यों में भी लागू होगा, जहां फिलहाल स्ढ्ढक्र की प्रक्रिया जारी है। पिछले छह हफ्तों में यह तीसरी बार है, जब आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर अपना रुख बदला है। दरअसल, आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में स्ढ्ढक्र से जुड़ा एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा था, जिसे भरना अनिवार्य था। इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से एक चुनकर बताना होता था कि क्या उसका नाम वर्ष 2000 के बाद हुई एसआईआर की मतदाता सूची में था, क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था या फिर इनमें से किसी का नाम पिछली मतदाता सूची में नहीं था। इस घोषणा के बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती थी। अब इस कॉलम को हटाकर स्ढ्ढक्र के लिए अलग फॉर्म उपलब्ध करा दिया गया है। फॉर्म-6 में स्ढ्ढक्र घोषणा जोडऩे के फैसले पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने 16 मई को कहा था कि निर्धारित फॉर्म में बदलाव के लिए कानूनी संशोधन जरूरी है। वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को अनधिकृत और अवैध बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी। इसके बावजूद जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म-6 में यह कॉलम जोड़ दिया गया था। दरअसल, फॉर्म-6 का प्रारूप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है और इसमें संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में आयोग द्वारा अपने स्तर पर बदलाव किए जाने पर सवाल उठे थे। चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में बताया था कि उसकी इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर को फॉर्म-6 और स्ढ्ढक्र घोषणा को अलग करने का फैसला लिया था। आयोग के अनुसार, दोनों प्रक्रियाओं को एक फॉर्म में रखने का उद्देश्य आवेदकों की सुविधा था, ताकि उन्हें दो बार ओटीपी और ई-सिग्नेचर की जरूरत न पड़े। हालांकि, आयोग ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म में घोषणा को जिस तरह शामिल किया गया। उससे ऐसा प्रतीत हो सकता था कि निर्धारित फॉर्म में संशोधन कर दिया गया है। इसी वजह से दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का निर्णय लिया गया।
फॉर्म-6 का मामला आयोग के भीतर दर्ज अन्य आपत्तियों के बीच सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोडऩे, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इसके बाद श्वष्टढ्ढहृद्गह्ल सॉफ्टवेयर में भी कई बदलाव किए गए हैं। अब दस्तावेजों में कमी या तार्किक विसंगतियों के मामलों में मतदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई अपवादस्वरूप होगी और बूथ लेवल अधिकारी (क्चरुह्र) उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। मतदाता निर्धारित 13 श्रेणियों के अलावा अन्य दस्तावेज भी जमा कर सकेंगे। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (श्वक्रह्र) को भी ऐसे मामलों में खुद निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है।
इसके अलावा आयोग की बैठकों से पहले एजेंडा साझा करने और बाद में कार्यवाही का विवरण जारी करने का फैसला हुआ है। अधिकारियों के विदेश दौरों के लिए आयोग की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। वहीं, नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले अधिकारियों की समिति और फिर आयोग की मंजूरी लेनी होगी।

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