नई दिल्ली, (आरएनएस)। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले नए फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को न तो मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है। न्यायालय ने कहा कि उसने इस घोषणापत्र की वैधता पर अब तक कोई फैसला नहीं दिया है और मामले की जांच की जाएगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी उस समय की, जब वह भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता पंजीकरण फॉर्म में किए गए बदलावों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के नए फॉर्म-6 को लेकर उसके रुख को मंजूरी या अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित एक अन्य याचिका को इस मामले में दाखिल प्रमुख याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में किए गए बदलावों से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
फॉर्म-6, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक आवेदन है।
इसके माध्यम से पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं।
विवाद फॉर्म-6 की मूल वैधता को लेकर नहीं, बल्कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान इसके साथ जोड़े गए अतिरिक्त घोषणापत्र को लेकर है। कुछ विशेषज्ञों ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए इसे मनमाना बताया है और इसकी वैधता पर आपत्ति जताई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अपने ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा था। इसमें नए आवेदकों से उनकी और उनके परिवार की पुरानी मतदाता सूची से संबंधित तीन सवाल पूछे गए थे।
इन सवालों में यह जानने का प्रयास किया गया था कि क्या आवेदक का नाम वर्ष 2000 के दशक की मतदाता सूची में दर्ज था। यदि उसका नाम सूची में नहीं था, तो क्या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी या नाना-नानी का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में शामिल था। इसके अलावा, परिवार के इन सदस्यों का नाम पिछली मतदाता सूची में दर्ज नहीं होने का कारण भी पूछा गया था।
अतिरिक्त घोषणापत्र में पूछे गए सवालों और उन्हें मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से जोडऩे के औचित्य को लेकर विवाद सामने आया है। याचिकाओं में चुनाव आयोग के इस कदम की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने अभी इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
पीठ की मौखिक टिप्पणी से स्पष्ट है कि नए फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र पर न्यायालय ने फिलहाल कोई अंतिम राय नहीं बनाई है। अब मामले की सुनवाई के दौरान इसकी वैधानिकता और संबंधित मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
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