नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उठाया सवाल
जमुई (आरएनएस)। बिहार के जमुई में नाबालिग किशोरी के साथ कथित यौन उत्पीडऩ के मामले में पुलिस ने घटना का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित कर पीडि़ता की पहचान उजागर करने के आरोप में 120 उपयोगकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने लोगों से अपील की है कि वे नाबालिग पीडि़ता से संबंधित वीडियो को सामाजिक माध्यमों पर साझा या प्रसारित न करें। उन्होंने कहा कि पीडि़ता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है।
पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार 19 सितंबर की शाम की है। कक्षा 10 में पढऩे वाला एक किशोर अपनी महिला मित्र के साथ जमुई के एक लोकप्रिय पहाड़ी पर्यटन स्थल से स्कूटर से लौट रहा था। इसी दौरान कुछ युवकों ने उनका पीछा किया और रास्ते में स्कूटर रोक लिया। आरोप है कि युवकों ने दोनों को गालियां दीं और स्कूटर से उतरने के लिए मजबूर किया। इसके बाद किशोरी के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीडऩ किया गया, जबकि उसके साथ मौजूद किशोर से मारपीट की गई।घटना का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। वीडियो को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग की गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।पुलिस के मुताबिक, घटना के संबंध में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन भी किया गया है।
पुलिस ने वीडियो के आधार पर सात संदिग्ध आरोपियों की पहचान की है। इनमें मुख्य आरोपी के फरार होने की जानकारी दी गई है और उसकी तलाश की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि पीडि़त किशोर-किशोरी की ओर से अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। इसके बावजूद पुलिस ने उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अधीक्षक ने लोगों को आगाह किया कि पीडि़ता से संबंधित वीडियो को सामाजिक माध्यमों पर साझा करना कानूनन अपराध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसी सामग्री को आगे प्रसारित करने के बजाय पुलिस को सूचना दें, ताकि पीडि़ता की पहचान और निजता सुरक्षित रह सके।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जमुई की घटना से संबंधित वीडियो बेहद परेशान करने वाला है। उन्होंने मांग की कि वीडियो में दिखाई देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की जाए और आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जल्द सजा दिलाई जाए।
राहुल गांधी ने बिहार सरकार से सवाल किया कि शाम के समय राज्य की सडक़ों पर कोई लडक़ी सुरक्षित क्यों नहीं है। इस बीच पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को पकडऩे के लिए संभावित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है।
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