मौसम विभाग ने दी चेतावनी, चक्रवाती तूफान की आशंका, भारी बारिश का अनुमान

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नई दिल्ली (आरएनएस)। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र मंगलवार को गहरे कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया और इसके अगले कुछ घंटों में और मजबूत होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह मौसमी तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और 23-24 सितंबर की रात उत्तरी आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा के तटों को पार कर सकता है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे लगे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना यह कम दबाव का क्षेत्र पिछले छह घंटों में करीब 18 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। मंगलवार सुबह 8:30 बजे यह 17.9 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 86.0 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास केंद्रित था।
मंगलवार दोपहर एक बजे तक यह गहरा कम दबाव का क्षेत्र विशाखापत्तनम से लगभग 290 किलोमीटर पूर्व में स्थित था। मौसम विभाग के मुताबिक, यह गोपालपुर से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, कलिंगपटनम से 200 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और पुरी से लगभग 210 किलोमीटर दक्षिण में था।विभाग ने अनुमान जताया है कि यह मौसमी तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहेगा और अगले 12 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी के ऊपर और गहरे कम दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है। इसके बाद भी इसके इसी दिशा में आगे बढऩे की संभावना है।इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से 22 से 25 सितंबर के बीच आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, तटीय इलाकों में तेज हवाओं और समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। मौसमी तंत्र के तट के निकट पहुंचने के साथ बारिश की तीव्रता बढऩे की संभावना है।
बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के चार जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। राज्य में अगले दो दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में खतरा अधिक बताया गया है, जहां पहले से लगातार बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले अगले चक्रवात का नाम ‘अर्णब’ होगा। यह नाम बांग्लादेश ने क्षेत्रीय उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामों की सूची के लिए प्रस्तावित किया था। इस सूची को विश्व मौसम विज्ञान संगठन और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से तैयार किया जाता है।
बंगाली भाषा में ‘अर्णब’ का अर्थ ‘सागर’ होता है। हालांकि, मौजूदा मौसमी तंत्र के बारे में मौसम विभाग ने फिलहाल इसे चक्रवाती तूफान के रूप में वर्गीकृत नहीं किया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग कम दबाव वाले मौसमी तंत्रों को उनकी तीव्रता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखता है। इसके लिए समुद्र और भूमि पर वायुदाब की स्थिति तथा समुद्र के ऊपर हवा की अधिकतम लगातार गति जैसे मानकों का इस्तेमाल किया जाता है।
जब किसी मौसमी तंत्र में एक बंद समदाब रेखा होती है, तो उसे कम दबाव का क्षेत्र माना जाता है। दो बंद समदाब रेखाएं होने पर इसे अवदाब और तीन बंद समदाब रेखाओं की स्थिति में गहरा अवदाब कहा जाता है। चार या उससे अधिक बंद समदाब रेखाओं वाले मौसमी तंत्र को चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है।
बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी तंत्र का प्रभाव तेलंगाना में भी दिखाई पड़ सकता है। मौसम विभाग ने राज्य में अगले चार से पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर कई जिलों के लिए पीली और नारंगी चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को तेलंगाना के कुछ पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के मद्देनजर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तथा प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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