स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को दिए कड़े निर्देश, डीएम को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

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लखनऊ,(आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के स्कूलों में पढऩे वाले मासूम बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रदेश भर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को कई सख्त और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करवाएं और स्कूल स्तर पर गठित समितियों के कामकाज की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करें। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड को भी पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
जिलाधिकारियों को सौंपी समिति गठन की जिम्मेदारी, एक माह में मांगी रिपोर्ट
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमों की धारा 222जी के तहत ‘विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति’ का विधिवत गठन अनिवार्य रूप से कराने का जिम्मा सौंपा है। कोर्ट ने आदेश दिया कि मुख्य सचिव प्रमाणित प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर सभी जिलों को यह निर्देश जारी करें। इसके साथ ही सभी जिला मजिस्ट्रेटों को तय नियमों के अनुपालन पर एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
बिना परमिट नहीं दौड़ेंगे स्कूली वाहन, परिवहन आयुक्त ने रखा ब्योरा
याचिका पर सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी अदालत में पेश हुए। परिवहन आयुक्त ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (छब्बीसवां संशोधन) नियम, 2019 के प्रावधानों का ब्योरा अदालत के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 222ए के तहत स्कूली बच्चों को ले जाने वाले सभी वाहनों के लिए विशेष परमिट अनिवार्य है, जिसके तहत शिक्षण संस्थानों की अपनी बसों और अनुबंधित निजी वाहनों के लिए अलग-अलग कड़े सुरक्षा मानक तय किए गए हैं।
निष्क्रिय समितियों पर जताई चिंता, 28 सितंबर को अगली सुनवाई
अदालत में यह बात भी सामने आई कि नियम 222ई के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को निगरानी का दायित्व सौंपा गया है, लेकिन धरातल पर नियम 222जी के अंतर्गत गठित समितियां वर्तमान में सक्रिय रूप से काम नहीं कर रही हैं। जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र के निष्क्रिय होने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की जिंदगी के साथ किसी भी सूरत में खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने सभी जिम्मेदार विभागों को तुरंत एक्शन मोड में आने और नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
 

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