नई दिल्ली (निप्र)। केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का नए सिरे से गठन किया है। नई व्यवस्था में फिल्म, टेलीविजन, संगीत, साहित्य और कला जगत से जुड़े कई चर्चित चेहरों को बोर्ड में जगह दी गई है। नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी और सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष तक हो सकता है।
नए बोर्ड में मनोज जोशी, प्रियदर्शन, सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी और प्रोसेनजीत चटर्जी जैसे नाम शामिल हैं। इनके अलावा संगीतकार रिकी केज, अभिनेता एवं सांसद हंसराज हंस, अभिनेत्री रूपाली गांगुली, फिल्ममेकर नीला माधब पांडा, अभिनेत्री पल्लवी जोशी और निशिगंधा वाड को भी सदस्य बनाया गया है। बोर्ड में विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, सुप्रिया यारलागड्डा, यतिंद्र मिश्रा, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे को भी शामिल किया गया है। मई 2026 में शशि शेखर वेम्पति को ष्टक्चस्नष्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, उनका कार्यकाल तीन वर्ष का है।
सीबीएफसी का क्या काम है?
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाला वैधानिक निकाय है। भारत में किसी फिल्म को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने से पहले सीबीएफसी से प्रमाणन लेना आवश्यक होता है। बोर्ड का गठन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत किया गया है। फिल्म की सामग्री की जांच के बाद उसे निर्धारित प्रमाणपत्र दिया जाता है। प्रमाणन व्यवस्था में यू, यूए, ए और एस जैसी श्रेणियां शामिल हैं। ‘’ सभी उम्र के दर्शकों के लिए, जबकि ए वयस्क दर्शकों के लिए होता है।
फिल्म को सर्टिफिकेट कैसे मिलता है?
फिल्म निर्माता सीबीएफसी की ऑनलाइन ई-सीनेप्रमान प्रणाली के जरिए प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकते हैं। फिल्म की जांच के दौरान उसकी सामग्री को निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों के आधार पर देखा जाता है। जरूरत के अनुसार प्रमाणन प्रक्रिया में संशोधन या कट की मांग की जा सकती है। सरकार के अनुसार, सीनेमाटोग्राफ नियम 2024 के तहत फिल्म प्रमाणन के लिए निर्धारित अधिकतम समयसीमा 48 कार्यदिवस है। फरवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि औसतन फीचर फिल्मों के प्रमाणन में करीब 18 कार्यदिवस और शॉर्ट फिल्मों में करीब 3 कार्यदिवस लग रहे थे।








