वीर सैनिकों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, जीवनभर मुफ्त रेल यात्रा कर सकेंगे जांबाज और उनके परिवार

Join Us

नई दिल्ली (आरएनएस)। देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय देने वाले जांबाज सैनिकों और उनके परिजनों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। सेना पदक, नौसेना पदक और वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित सैनिकों को अब भारतीय रेल में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। सरकार के इस कदम का लाभ न केवल वीरता पुरस्कार विजेता सैनिकों को बल्कि उनके जीवनसाथी को भी ताउम्र मिलेगा। इसके अलावा, विधवा या विधुर के मामलों में यह सुविधा उनके पुनर्विवाह तक लगातार जारी रहेगी।
शहीद अविवाहित सैनिकों के माता-पिता भी होंगे शामिल
रक्षा मंत्रालय की इस विशेष पहल में उन जांबाजों के परिवारों का भी खास ख्याल रखा गया है जिन्होंने देश सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। सेना के अनुसार, इस योजना के दायरे में उन वीर सैनिकों के माता-पिता को भी शामिल किया गया है, जिन्हें अविवाहित रहते हुए मरणोपरांत वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। इस नीति के तहत सभी पात्र लाभार्थी भारतीय रेलवे की प्रथम श्रेणी , द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी और एसी चेयर कार में आरामदायक और ससम्मान सफर कर सकेंगे।
पूरी व्यवस्था होगी डिजिटल, 1 नवंबर से ऑनलाइन बुकिंग
योजना को बेहद पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस (कागज रहित) रखा है। लाभार्थियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए भारतीय रेलवे रियायत कार्ड पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी जाएगी।
दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन और प्रमाणीकरण के बाद लाभार्थियों के लिए सीधे ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक यात्रा पास जारी कर दिए जाएंगे। इस ई-पास के जरिए टिकट बुक करने की आधिकारिक शुरुआत 1 नवंबर 2026 से आईआरसीसीपी के वेब पोर्टल के माध्यम से कर दी जाएगी।
त्याग और बलिदान के प्रति राष्ट्र का सच्चा सम्मान
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम को महज एक सामान्य रेल रियायत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों और उनके परिवारों के त्याग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। डिजिटल पास व्यवस्था से बुजुर्ग माता-पिता और वीरांगनाओं को अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी, जिससे वे गरिमा और स्वाभिमान के साथ इस अधिकार का लाभ उठा सकेंगे।

Previous articleजन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम बदलेंगे, 1 अक्टूबर से 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी
Next articleरूस से तेल खरीद पर अमेरिकी कानून को लेकर भारत सतर्क, कहा-हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे कदम