देश में बारिश की कमी बढक़र 15 फीसदी तक होने की आशंका, कई राज्यों की बढ़ी चिंता

Join Us

नई दिल्ली (आरएनएस)। देश में इस मानसून मौसम के दौरान 8 सितंबर तक बारिश की कमी बढक़र करीब 14 प्रतिशत हो गई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून की विदाई तक यह कमी लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण जल उपलब्धता और कृषि क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है।बारिश की कमी का असर कई राज्यों में खेती पर भी दिखाई दे रहा है। खासकर आंध्र प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी सबसे अधिक करीब 44 प्रतिशत दर्ज की गई है। पंजाब में 39 प्रतिशत, राजस्थान में 25 प्रतिशत, गुजरात में 19 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 16 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में सात प्रतिशत कम बारिश हुई है।
दिल्ली में भी सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
हालांकि आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की स्थिति अलग रही है। रायलसीमा और तटीय आंध्र के कुछ इलाकों में सामान्य से करीब 42 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में बारिश की संभावना जताई है।
महाराष्ट्र में भी बारिश की कमी बनी हुई है। मराठवाड़ा और विदर्भ के कई इलाकों में अगस्त के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बारिश की कमी दूर नहीं हो सकी। कम वर्षा से इन क्षेत्रों में किसानों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
सूखे जैसी परिस्थितियों का असर फसलों पर पडऩे की आशंका है। महाराष्ट्र देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है, इसलिए यहां बारिश की कमी का प्रभाव कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।
राजस्थान में इस मानसून मौसम में करीब 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जैसलमेर और बाड़मेर समेत राज्य के कुछ हिस्सों में 14 अगस्त के बाद बारिश काफी कम होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के अंतिम चरण में होने वाली बारिश किसानों के लिए कुछ राहत लेकर आ सकती है। देर से होने वाली बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ सकती है और आगामी रबी फसल की तैयारी में किसानों को मदद मिल सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के महत्वपूर्ण समय में बड़े पैमाने पर प्रभावी मौसम प्रणालियां विकसित नहीं होने के कारण बारिश की कमी बढ़ी है। अगस्त का महीना विशेष रूप से महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में कमजोर रहा।
बारिश की कमी को पूरा करने के लिए जिस व्यापक और लगातार भारी वर्षा की आवश्यकता थी, उसके लिए वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं।
हालांकि, अब बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र से मध्य और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश होने की उम्मीद है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है।
9 सितंबर को देश के कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
*मिजोरम: 37.9 मिलीमीटर, सामान्य से 167 प्रतिशत अधिक
*त्रिपुरा: 19.1 मिलीमीटर, 125 प्रतिशत अधिक
*अंडमान-निकोबार द्वीप समूह: 41.0 मिलीमीटर, 158 प्रतिशत अधिक
*लद्दाख: 0.7 मिलीमीटर, 167 प्रतिशत अधिक
*नगालैंड: 8.7 मिलीमीटर, 29 प्रतिशत अधिक
*झारखंड: 8.6 मिलीमीटर, 14 प्रतिशत अधिक
*सिक्किम: 11.1 मिलीमीटर, नौ प्रतिशत अधिक
मौसम विभाग ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। ओडिशा में 10 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में 13 सितंबर से एक बार फिर भारी बारिश हो सकती है। शुक्रवार को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडोरी जिलों में भारी बारिश की संभावना है।
मध्य प्रदेश में सामान्य तौर पर करीब 37.3 इंच बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक राज्य में लगभग सात प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले सप्ताह हुई अच्छी बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, विशेषकर पूर्वी मध्य प्रदेश में।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में आने वाले दिनों में बारिश हो सकती है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 14 से 16 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
पिछले 24 घंटे के दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने 10 से 16 सितंबर के बीच हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत, कोंकण-गोवा, तमिलनाडु और केरल समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
ओडिशा में 10 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में अगले 48 घंटों के दौरान खराब मौसम और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, देश से मानसून की वापसी की प्रक्रिया करीब 17 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है। हालांकि, मानसून की वापसी एक क्रमिक प्रक्रिया है और यह सामान्य तौर पर अक्टूबर के मध्य तक जारी रह सकती है।
मानसून की वापसी का समय मौसम की परिस्थितियों, हवाओं के रुख में बदलाव और उच्च दबाव क्षेत्र के बनने जैसी स्थितियों पर निर्भर करता है।
फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बनी मौसम प्रणाली और अगले कुछ दिनों में संभावित बारिश से देश के उन हिस्सों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा हुई है। वहीं, किसानों और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों की नजर अब मानसून के अंतिम दौर की बारिश पर टिकी है।
००

Previous articleब्रिक्स समिट 2026: भारत मंडपम में मंच तैयार, पीएम मोदी करेंगे ग्लोबल पावरहाउस की मेजबानी
Next articleमणिपुर में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चार उग्रवादी गिरफ्तार