नई दिल्ली (ए.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती क्षमताओं को लेकर एक तरफ जहां दुनिया में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर इसके संभावित खतरों को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है। एक ओर ओपनएआई ने दावा किया है कि उसके एआई सिस्टम ने करीब 90 वर्षों से अनसुलझी नेवियर-स्टोक्स समस्या का समाधान खोज लिया है, वहीं एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता के इस्तीफे और उसके बाद कंपनी के वरिष्ठ एआई सुरक्षा शोधकर्ता की चेतावनी ने बहस को और तेज कर दिया है।
एआई हम सबको मार देगा
क्लाउड बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि इस दशक के अंत तकएआई हम सबको मार सकता है। जो लोग एआई विकसित कर रहे हैं, उन्हें इसके बारे में पता है। एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को इस्तीफा दिया और चेतावनी दी कि एआई सभी इंसानों को खत्म कर सकता है
एंथ्रोपिक के शोधकर्ता ने दिया इस्तीफा
इसी बीच एआई कंपनी एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने इस्तीफा देते हुए एआई के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। कॉक्सन ने आरोप लगाया कि एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां तेजी से खुद को सुधारने वाली सुपरइंटेलिजेंट एआई प्रणालियां विकसित करने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं और सुरक्षा के मुकाबले क्षमता को प्राथमिकता देने का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि एआई विकसित करने वाले कुछ लोग निजी तौर पर इस तकनीक से मानव अस्तित्व को होने वाले खतरे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं।
कॉक्सन की चेतावनी को एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस प्रमुख इवान हुबिंगर ने भी सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया। हुबिंगर ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अगले दशक में एआई द्वारा सभी इंसानों के खत्म होने की संभावना 10 प्रतिशत से अधिक लगती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सुपरइंटेलिजेंट एआई को मानव हितों के अनुरूप बनाए रखने के लिए कंपनी के पास अभी स्पष्ट और पर्याप्त समाधान नहीं है।
88 घंटे में मिली गणितीय सफलता
चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई ने 8 सितंबर को दावा किया कि उसके आंतरिक एआई सिस्टम ने नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व और स्मूथनेस समस्या का समाधान तैयार किया है। यह गणित की सात मिलेनियम प्राइज समस्याओं में शामिल है और करीब 90 वर्षों से अनसुलझी थी। कंपनी के मुताबिक, एआई एजेंटों ने 5 सितंबर को लगभग 88 घंटे में समाधान तक पहुंच बनाई, जबकि उसके औपचारिक सत्यापन में अतिरिक्त 17 घंटे लगे।ओपनएआई के अनुसार, इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में एआई एजेंटों को अलग-अलग तरीकों से समस्या पर काम कराया गया और बाद में उनके निष्कर्षों को एक साथ जोड़ा गया। कंपनी ने समाधान का लिखित विवरण और लीन में औपचारिक प्रमाण भी जारी किया है। हालांकि, गणितीय समुदाय में इस दावे की स्वतंत्र समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
एआई की साइबर क्षमता भी बढ़ी
एआई की बढ़ती स्वायत्तता को लेकर चिंता का एक बड़ा कारण उसकी साइबर सुरक्षा क्षमताओं में तेजी से हो रहा विकास है। ओपनएआई के नए जीपीटी-6 एस्ट्रा के बारे में कंपनी ने खुद कहा है कि यह ऐसे मॉडल स्तर तक पहुंच गया है, जहां उचित टूल और एक्सेस मिलने पर यह इंसानी मार्गदर्शन के बिना पहले से अज्ञात सुरक्षा खामियों की पहचान कर उनका इस्तेमाल करने के तरीके विकसित कर सकता है। कंपनी के सुरक्षा परीक्षणों में एस्ट्रा ने कुछ मामलों में जीरो-डे कमजोरियों की खोज और उनके इस्तेमाल की क्षमता दिखाई।हालांकि, ओपनएआई का कहना है कि इन क्षमताओं के साथ सुरक्षा उपायों को भी मजबूत किया गया है और उत्पादन स्तर पर मॉडल पर कई प्रतिबंध लागू किए गए हैं। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसके परीक्षणों में एस्ट्रा पिछले मॉडल की तुलना में कई तरह के जोखिमपूर्ण व्यवहार से बेहतर तरीके से बचता है।
एआई की दौड़ में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
एआई कंपनियों के बीच अधिक शक्तिशाली और स्वायत्त मॉडल विकसित करने की होड़ तेज हो चुकी है। एक तरफ ये मॉडल गणित, कोडिंग, विज्ञान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इंसानों की क्षमता बढ़ाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि एआई की क्षमताएं मानव नियंत्रण और सुरक्षा उपायों से अधिक तेजी से बढ़ीं तो जोखिम भी बढ़ सकता है।फिलहाल मानवता के लिए एआई से अस्तित्व संबंधी खतरे की संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों में एक राय नहीं है। लेकिन ओपनएआई की गणितीय उपलब्धि और एंथ्रोपिक के अंदर से उठ रही सुरक्षा संबंधी आवाजें यह जरूर संकेत देती हैं कि एआई की अगली दौड़ केवल ज्यादा शक्तिशाली मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और नियंत्रित रखने की भी होगी।








