कोनोली-कुन्हेमैन की क्यों हुई ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में वापसी? समझिए नेसर कैसे बन सकते हैं साउथ अफ्रीका में ट्रंप कार्ड

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नई दिल्ली ,07 सितंबर । साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम का ऐलान हो गया है। मैथ्यू कुन्हेमैन, कूपर कोनोली और माइकल नेसर की टीम में वापसी हुई है। आइए आपको बताते हैं इन तीनों खिलाडिय़ों को किस आधार पर टेस्ट टीम में वापस बुलाया गया है। कूपर कोनोली : ऑस्ट्रेलिया के उभरते हुए ऑलराउंडर कूपर कोनोली ने पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। लगभग डेढ़ साल बाद कोनोली को दोबारा से टेस्ट टीम में जगह दी गई है। इसका कारण यह है कि कोनोली ने पिछले कुछ समय में अपनी बल्लेबाजी से खासा प्रभावित किया है। बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में कोनोली का प्रदर्शन दमदार रहा था। उन्होंने सीरीज के तीसरे वनडे में 149 रनों की बड़ी पारी खेलकर अपने धैर्य और संयम का परिचय दिया था। कोनोली तेजी से रन बटोरने में तो माहिर है ही लेकिन उनकी बल्लेबाजी में वो स्थिरता भी नजर आती है, जो टेस्ट फॉर्मेट में कामयाब होने के लिए एक बल्लेबाज के लिए सबसे जरूर मानी जाती है। बल्ले के साथ-साथ वह गेंद से भी अहम योगदान दे सकते हैं। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कोनोली का बल्लेबाजी औसत 42.10 का रहा है।
मैथ्यू कुन्हेमैन: साल 2023 में भारत दौरे पर आए मैथ्यू कुन्हेमैन ने अपनी गेंदबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उस सीरीज में कुन्हेमैन ने 3 टेस्ट मैचों में 9 विकेट अपने नाम किए थे। यही नहीं, बल्कि नाथन लायन के साथ मिलकर वह भारतीय बल्लेबाजों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हुए थे। बाएं हाथ के स्पिनर का प्रदर्शन जून में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में भी दमदार रहा था और वह घरेलू क्रिकेट में भी लगातार अपनी काबिलियत साबित करते रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने किफायती गेंदबाजी करने के साथ-साथ 3 मुकाबलों में 5 विकेट भी निकाले थे। यही वजह है कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए उन्हें नाथन लायन का साथ देने के लिए एक बार फिर से चुना गया है।
माइकल नेसर:चोट के कारण बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज को मिस करने वाले माइकल नेसर की टीम में वापसी हुई है। एशेज सीरीज 2025-26 में नेसर ने अपनी गेंदबाजी से हर किसी को खासा प्रभावित किया था। उन्होंने महज 3 मुकाबलों में 15 विकेट अपने नाम किए थे। साउथ अफ्रीका की उछाल लेती पिचों पर नेसर काफी कारगर साबित हो सकते हैं। गेंद के साथ-साथ वह बल्ले से भी योगदान देने की काबिलियत रखते हैं। नेसर के होने से ऑस्ट्रेलियाई टीम की गेंदबाजी तो मजबूत होगी ही, इसके साथ ही टीम की बललेबाजी में गहराई भी बढ़ेगी।

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