भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 बिलियन डॉलर बढक़र ऑल-टाइम हाई 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंचा

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नई दिल्ली (आरएनएस)। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 28 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 11.475 बिलियन डॉलर बढक़र अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए डेटा में दी गई। इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 729.328 बिलियन डॉलर था, जो कि 21 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में दर्ज किया गया था।
आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 9.337 बिलियन डॉलर बढक़र 600.670 बिलियन डॉलर हो गई है।
एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की कई अहम वैश्विक मुद्राएं जैसे येन, यूरो और पाउंड होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में दिखाया जाता है।
इस दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 2.191 बिलियन डॉलर बढक़र 116.409 बिलियन डॉलर हो गई है।
आरबीआई के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 43 मिलियन डॉलर घटकर 18.810 बिलियन डॉलर रही है। वहीं, भारत की आरबीआई में रिजर्व पॉजिशन 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.914 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है।देश के विदेशी मुद्रा भंडार बढऩे की वजह डॉलर आकर्षित करने की लिए आरबीआई की ओर से शुरू की गई स्कीमों को माना जा रहा है, जिसके तहत देश में करीब 136 बिलियन डॉलर से अधिक का फंड आया है।किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है, और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है।
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