कश्मीरी पंडितों को फिर से आतंकी धमकी, एक चिट्ठी में निजी जानकारी सार्वजनिक की गई

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श्रीनगर (आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित समुदाय को कथित तौर पर धमकी देने वाला एक और पत्र सामाजिक माध्यमों पर सामने आने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब करीब दो सप्ताह पहले भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाकर इसी तरह का एक धमकी भरा पत्र प्रसारित हुआ था। सुरक्षा एजेंसियां नए पत्र की सत्यता और इसके स्रोत की जांच कर रही हैं। अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।कथित रूप से संयुक्त मुक्ति परिषद के नाम से जारी नए पत्र में जम्मू में रहने वाले करीब आधा दर्जन कश्मीरी पंडितों के नाम और निजी जानकारियां शामिल होने का दावा किया गया है। पत्र में उनके आवासीय क्षेत्र और वाहनों से संबंधित जानकारी का भी उल्लेख है। पत्र में इन लोगों पर दिल्ली में बैठे अपने कथित आकाओं के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की धमकी दी गई है।
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए यह एक महीने के भीतर सामने आया दूसरा ऐसा मामला है। इससे पहले अगस्त में सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित एक कथित पत्र में कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी साझा की गई थी। उस मामले के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को कुछ समय तक घर से काम करने और सतर्क रहने की सलाह दी थी।
ताजा पत्र में इस बार ऐसे कश्मीरी पंडितों को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जो 1990 के दशक में आतंकवाद के कारण घाटी छोडक़र जम्मू तथा देश के अन्य हिस्सों में चले गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, पत्र में घाटी में रह गए कश्मीरी पंडितों और बाहर चले गए लोगों के बीच अंतर करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
नए धमकी पत्र में कथित रूप से नाम, पते और वाहनों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक किए जाने से सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि इतनी संवेदनशील जानकारी धमकी देने वालों तक कैसे पहुंची। सुरक्षा एजेंसियां पत्र की वास्तविकता की जांच के साथ-साथ इसके प्रसार के स्रोत का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।
कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा है कि इस तरह की धमकियों से घाटी में रहने वाले लोगों, विशेषकर महिलाओं और परिवारों में भय तथा मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
सर्व प्रधानमंत्री पैकेज कर्मचारी मंच, कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
मंच ने कहा कि 23 अगस्त को कथित रूप से जारी नया धमकी पत्र गंभीर चिंता का विषय है। संगठन के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी पत्र की सत्यता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन संवेदनशील निजी जानकारी वाले ऐसे धमकी भरे पत्रों का बार-बार सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है।
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पत्र के स्रोत का पता लगाया जाए, निजी जानकारियां सार्वजनिक करने वालों की पहचान की जाए और कर्मचारियों तथा उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
मंच से जुड़े एक कर्मचारी ने कहा कि धमकियों के बावजूद वे डरने या घाटी छोडऩे वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर उनकी जन्मभूमि है और प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि धमकी भरे पत्र कहां से तैयार और प्रसारित किए जा रहे हैं तथा संवेदनशील जानकारियां किस तरह इन लोगों तक पहुंच रही हैं।
संयुक्त मुक्ति परिषद नाम से सामने आए इन पत्रों को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में इस संगठन के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों का उल्लेख किया गया है, लेकिन ताजा पत्र की प्रामाणिकता और इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां इसकी सामग्री, स्रोत और प्रसार की जांच कर रही हैं।
लगातार सामने आ रही धमकियों ने घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। समुदाय और कर्मचारी संगठन अब प्रशासन से ठोस सुरक्षा व्यवस्था तथा धमकियों के स्रोत का शीघ्र पता लगाने की मांग कर रहे हैं।
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