अगस्त में मानसून सामान्य से कम, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे जैसे हालात,17 सितंबर से पहले विदाई के संकेत

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नई दिल्ली, (आरएनएस)। देश में इस समय मानसून का मिजाज विरोधाभासी बना हुआ है। जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव के चलते मौसम का पूर्वानुमान लगाना मौसम विशेषज्ञों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। एक ओर कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कई इलाके अब भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर इसका प्रमुख उदाहरण है। मौसम बुलेटिन में रोजाना भारी बारिश की संभावना जताई जाती है, लेकिन कई बार दिन के अंत में बारिश उम्मीद के अनुरूप नहीं होती। इसके चलते तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है और लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त में देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है और फिलहाल बारिश में करीब 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। शुरुआत में लगातार बारिश के कारण इस कमी के पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन धीरे-धीरे बारिश की गतिविधियां कमजोर पडऩे से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मौसम विज्ञान विभाग के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, कम दबाव वाली मौसम प्रणालियों की स्थिति को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य समय से करीब 15 प्रतिशत पहले समाप्त होने की संभावना बन रही है। उन्होंने कहा कि पहले उम्मीद थी कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थिति अल नीनो के प्रभाव को कम करके मानसून को मजबूती देगी, लेकिन यह स्थिति दोबारा तटस्थ अवस्था में लौट गई है। ऐसे में अगस्त के शेष दिनों और सितंबर में व्यापक स्तर पर अच्छी बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है।राजस्थान और गुजरात के अलावा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने का अनुमान है। शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं बंगाल की खाड़ी से आने वाली मौसम प्रणालियों को इन क्षेत्रों में मजबूत होने से रोक रही हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी सूखे जैसे हालात पैदा कर सकती है।
मानसून के मौसम को शुरू हुए करीब तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन देश के कई हिस्सों में बारिश अब भी असमान बनी हुई है। हरियाणा, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश की कमी गंभीर बनी हुई है। इन राज्यों के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से करीब 40 से 45 प्रतिशत तक कम दर्ज की गई है।
पंजाब में बारिश की कमी करीब 32 प्रतिशत और कर्नाटक में करीब 25 प्रतिशत बताई गई है। बारिश की कमी का असर कृषि और ग्रामीण आजीविका पर पडऩे की आशंका है।
महाराष्ट्र में अगले दो सप्ताह यानी 4 सितंबर तक सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। बारिश में क्षेत्रवार उतार-चढ़ाव के कारण कई इलाकों में खरीफ फसलों के लिए सिंचाई की समस्या पैदा हो सकती है।
महाराष्ट्र के आंतरिक हिस्सों तथा सौराष्ट्र-कच्छ में फिलहाल पर्याप्त बारिश कराने वाली मौसम प्रणालियां सक्रिय नहीं हैं। बिहार के तराई क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर बारिश की कमी बनी हुई है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार बदलते मौसम के मिजाज के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान से 17 सितंबर से पहले विदा हो सकता है। हालांकि मानसून की वास्तविक विदाई इस बात पर निर्भर करेगी कि बारिश की गतिविधियां कितनी जल्दी कमजोर होती हैं और शुष्क हवाएं कितनी मजबूत होती हैं।
राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में मानसून की जल्दी विदाई की स्थिति बनने पर गर्मी और शुष्कता बढ़ सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 27 अगस्त तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, दक्षिणी और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
22 से 27 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार समेत पूर्वी भारत के कई हिस्सों में 22 से 26 अगस्त के बीच मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में 27 अगस्त तक गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है। इस दौरान तेज हवाएं चल सकती हैं और उनकी गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
असम, मेघालय और आसपास के राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है। इससे पहाड़ी और निचले इलाकों में जलभराव तथा बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र तथा गुजरात में सप्ताह के दौरान भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की सामान्य तेज हवाओं के बीच कुछ स्थानों पर हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
देश में मानसून की मौजूदा स्थिति ने मौसम विज्ञानियों और कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। जहां कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन रही है, वहीं कई राज्यों में बारिश की कमी से खेती प्रभावित होने की आशंका है।
आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों, शुष्क हवाओं और मौसम प्रणालियों की स्थिति यह तय करेगी कि बारिश की कमी वाले क्षेत्रों को कितनी राहत मिलती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून देश से कब पूरी तरह विदा होता है।
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