तरुण तेजपाल ने यौन उत्पीडऩ मामले में अपनी सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

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नई दिल्ली (आरएनएस)। पत्रकार तरुण तेजपाल ने गुरुवार को 2013 के यौन उत्पीडऩ मामले में अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इस अपील में बॉम्बे हाई कोर्ट के 6 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई है।
इससे पहले, गोवा सरकार ने तहलका के पूर्व एडिटर के लिए सजा बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी, और कहा था कि इस मामले में उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए. 6 अगस्त को, हाई कोर्ट की गोवा पीठ के जस्टिस नीला गोखले और अमित जमसांडेकर ने शुरू में कहा था कि तेजपाल को दो हफ़्ते के अंदर सरेंडर करना होगा, लेकिन उनके वकीलों के अनुरोधके बाद, कोर्ट ने समय बढ़ाकर चार हफ्ते कर दिया।
कोर्ट ने कम से कम सजा देते हुए कहा कि यह घटना 13 साल पहले हुई थी और तब से तेजपाल ने कोई दूसरा जुर्म नहीं किया है.
कोर्ट ने कहा, दोनों पक्ष (पीडि़ता और तेजपाल) अब जिंदगी में आगे बढ़ चुके होंगे. कोर्ट ने तेजपाल पर 10 लाख 21हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो पीडि़ता को दिया जाएगा. हाई कोर्ट ने कहा, यौन उत्पीडऩ झेलने वाली पीडि़ता को जुर्माने की पूरी रकम दी जाएगी.
तेजपाल ने नरमी की अपील करते हुए दावा किया कि वह एक राजनीतिक शिकार हैं और दो बेटियों के पिता हैं. वहीं, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ज़्यादा से ज़्यादा सजा की मांग की ताकि यह कड़ा मैसेज जाए कि नहीं का मतलब नहीं होता.
पीठ ने कहा, हम ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को रद्द करते हैं. उत्तरदाता (तेजपाल) दोषी हैं.
तेजपाल ने कहा कि वह हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उन्हें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (2) (एफ) (व्यक्ति जो अभिभावक है या विश्वास या अधिकार की स्थिति में है, किसी महिला के साथ बलात्कार करता है), 354 (ए) (यौन उत्पीडऩ) और 354 (बी) (किसी महिला पर उसके कपड़े उतारने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग करना) के तहत दोषी ठहराया गया है.

 

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