नई दिल्ली (ए.)। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (नीट यूजी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने एक बड़ा दावा किया है। विवादों और गड़बड़ी के गंभीर आरोपों के बीच सरकार ने बुधवार को शीर्ष अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से फुलप्रूफ है और इसके सुरक्षा चक्र को तोड़ पाना लगभग नामुमकिन है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने प्रश्नपत्र बनने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी अभेद्य प्रक्रिया का विस्तार से ब्योरा पेश किया। अदालत ने एनटीए को सुधार कमेटियों की सिफारिशें लागू करने पर हलफनामा देने का भी निर्देश दिया है।
आखिरी वक्त तक किसी को नहीं होता असली पेपर का पता
सरकार ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्रों का निर्माण बेहद गोपनीय और जटिल तरीके से होता है। मॉडरेटरों का एक समूह सौ-सौ प्रश्नों का चयन करके चार अलग-अलग सेट तैयार करता है। सुरक्षा का आलम यह है कि खुद मॉडरेटरों को भी नहीं पता होता कि छात्रों के सामने कौन सा सेट आने वाला है। इन तैयार चार सेटों में से एनटीए के महानिदेशक परीक्षा के लिए केवल दो सेट चुनते हैं, जिससे आखिरी समय तक असली प्रश्नपत्र का राज पूरी तरह से बरकरार रहता है।सीसीटीवी की निगरानी और डिजिटल लॉक का कड़ा पहरा
प्रश्नपत्रों की छपाई भी सीआईएसएफ की कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेसों में होती है। इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है। यहां तक कि प्रिंटर को भी यह नहीं बताया जाता कि वह किस परीक्षा का पेपर छाप रहा है। इसके बाद, प्रश्नपत्र ले जाने वाले अधिकारी के पास डिजिटल लॉक वाला बॉक्स होता है, जिसका कोड उसे खुद भी मालूम नहीं होता। प्रिंटिंग प्रेस पहुंचने पर वह व्यक्तिगत रूप से डीजी को सूचित करता है और वहां से मिले कोड के जरिए ही बॉक्स का ताला खोला जाता है।
जीपीएस से लैस गाडिय़ां और बैंकों का स्ट्रांग रूम
सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए प्रश्नपत्रों को ऐसे लिफाफों और बक्सों में सील किया जाता है जिनकी नकल नहीं की जा सकती। इन लोहे के बक्सों में एक बार इस्तेमाल होने वाला खास ताला लगा होता है जिसे सिर्फ तोड़ा जा सकता है। जिन गाडिय़ों में इन्हें ले जाया जाता है, वे जीपीएस से लैस होती हैं, जिससे उनकी छोटी सी हलचल भी सीधे एनटीए मुख्यालय में दर्ज होती है। इसके बाद इन बक्सों को दो अलग-अलग बैंकों के स्ट्रांग रूम में कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच रखा जाता है, जहां बैंक मैनेजर, एनटीए प्रतिनिधि और सिटी कोऑर्डिनेटर के हस्ताक्षर होते हैं।
परीक्षा के दिन छात्रों के सामने कटता है ताला
इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम और सबसे अहम पड़ाव परीक्षा वाले दिन सुबह आता है, जब एनटीए के महानिदेशक सिटी कोऑर्डिनेटर को निर्देश देते हैं कि किस बैंक के बक्से का इस्तेमाल करना है (जिससे दूसरे बैंक का बक्सा निरर्थक हो जाता है)। इसके बाद भारी पुलिस सुरक्षा और वीडियोग्राफी के साथ इन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले, दो छात्रों की उपस्थिति में लोहे काटने वाली आरी (हेक्सा) से बक्से का ताला काटा जाता है। अंत में क्लास कोऑर्डिनेटर द्वारा छात्रों को पैकेट बांटे जाते हैं, जिसे छात्र खुद अपने हाथों से खोलते हैं।








