नई दिल्ली/विदिशा, (आरएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के काकरौआ गांव के स्कूली बच्चों द्वारा जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी पार कर स्कूल जाने की मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे बच्चों के शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मानवाधिकारों का गंभीर मामला मानते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काकरौआ गांव के नौ विद्यार्थी, जिनमें पांच छात्राएं शामिल हैं, प्रतिदिन बेतवा नदी के स्टॉप डैम के खुले खंभों पर चलकर स्कूल पहुंचते हैं। बच्चे यह खतरनाक रास्ता इसलिए अपनाते हैं क्योंकि इससे सडक़ मार्ग की लगभग 13 किलोमीटर की दूरी घटकर केवल 1.5 किलोमीटर रह जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबी दूरी और परिवहन सुविधा के अभाव में बच्चों के सामने यही एक व्यावहारिक विकल्प बचता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही हैं, तो यह बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। आयोग ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21ए छह से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ (2009) के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि शिक्षा के अधिकार में सुरक्षित विद्यालय और सुरक्षित आधारभूत संरचना का अधिकार भी शामिल है। आयोग के अनुसार, यदि बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है, तो यह उनके गरिमापूर्ण शिक्षा के मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है।
4 अगस्त 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांध के खुले खंभों को पार करते हुए बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश अभिभावक खेती-किसानी और मजदूरी में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण वे प्रतिदिन बच्चों को दूर स्थित स्कूल तक छोडऩे और वापस लाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उनके सामने या तो बच्चों की पढ़ाई छुड़ाने का विकल्प है या उन्हें जोखिम भरे रास्ते से स्कूल भेजने की मजबूरी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कम कद होने के कारण एक छात्रा स्टॉप डैम के खंभों को पार नहीं कर सकी, जिसके चलते वह विद्यालय नहीं पहुंच पाई और अंतिम परीक्षा में असफल हो गई। घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके का निरीक्षण कर जिला कलेक्टर को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन नदी पार करने के लिए सुरक्षित मार्ग या पुल के निर्माण की कोई निश्चित समयसीमा अब तक घोषित नहीं की गई है।
एनएचआरसी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच, आधारभूत संरचना और बच्चों के अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्नों को केंद्र में ला दिया है। आयोग ने संकेत दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है तथा राज्य सरकार से इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।
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