नई दिल्ली (आरएनएस)। आप एक सांसद हैं- राजनीति में आने के बाद, आपको अंडों से डर लगता है? जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं? सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ये मौखिक टिप्पणियां की, क्योंकि उसने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें हेट-स्पीच मामले में 15 अगस्त को पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था.यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने आया. सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बेंच के सामने सांसद की तरफ से केस लड़ा. बेंच ने साफ कर दिया कि वह हाईकोर्ट के ऑर्डर में दखल नहीं देना चाहती सुनवाई के दौरान, मोइत्रा के वकील ने कहा कि पुलिस के नोटिस के मुताबिक उन्हें अपने चुनाव क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में पेश होना है.
शंकरनारायणन ने कहा कि पिछली बार जब उनका क्लाइंट वहां गयी थी तो दो बातें हुई. पहली, अंडे फेंकने की धमकी दी गई वगैरह और दूसरी, अंडे सच में फेंके गए. मोइत्रा के वकील ने जोर देकर कहा कि उन्हें पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने का कानूनी अधिकार है.
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, आप संसद सदस्य हैं. राजनीति में कदम रखने के बाद, आपको अंडे से डर लगता है? पीठ ने आगे कहा, जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई हैं? ये ऐसे आवेदन हैं जो इस अदालत के समक्ष बिल्कुल भी नहीं आने चाहिए. यह महसूस करते हुए कि पीठ याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस ले ली और मामले को वापस लिया गया मानकर खारिज कर दिया गया.
21 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने हेट स्पीच के एक मामले में मोइत्रा को 5 अक्टूबर तक ज़बरदस्ती की कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी. मोइत्रा ने दावा किया था कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है. मोइत्रा ने कोर्ट से इस मामले में ज़बरदस्ती पुलिस कार्रवाई रोकने और नादिया जिले के होगोलबेरिया पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द करने के लिए एक अंतरिम आदेश देने की मांग की.








