नईदिल्ली(आरएनएस)। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद चलो मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इस दौरान परिजनों ने कहा कि वे भी इस देश के नागरिक हैं और उन्हें भी न्याय मिलना चाहिए। परिजनों ने संसद में चर्चा की भी मांग की। घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने कथित हमलों के वीडियो दिखाए और आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन में घुसपैठ की थी।
एक घायल पुलिसकर्मी की बेटी ने कहा, मेरे पिता मुख्य विरोध स्थल पर थे। वे अग्रिम पंक्ति में, बैरिकेड्स के पास थे। मेरे पिता को उपद्रवी भीड़ ने घसीटा और लगभग पीट-पीटकर मार डाला। वे अस्पताल में लगभग 4 घंटे तक बेहोश रहे। रात करीब 10 बजे सहकर्मी उन्हें घर लाए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी। उन्हें उस हालत में देखना हमारे लिए बेहद दर्दनाक था। वह रात हमारे परिवार के लिए सबसे कठिन रातों में से एक थी।
प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस के एसीपी की पत्नी ने कहा, 20 जुलाई की देर रात जब वे घायल हालत में घर लौटे, तो वह पल मेरे और मेरी 2 साल की बेटी, दोनों के लिए बेहद दर्दनाक और सदमे वाला था। लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ अकेला इंसान नहीं होता। उसके पीछे उसका परिवार होता है-उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं।
लक्ष्य मेहता, जिनके पुलिसकर्मी पिता घायल हुए, उन्होंने कहा, उनके सिर पर चोट लगी थी। प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थर से हमला किया। पुलिसकर्मी भी समाज का हिस्सा हैं। उनको अपराधी बताया जा रहा है। उन्हें बहादुरी के लिए 4 सम्मान मिल चुके हैं। जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और 4 टांके लगे थे। मैं डर गया था। पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे।
दिल्ली पुलिस में सहायक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी सीमा ने कहा, उन्होंने मुझे बताया कि भीड़ बहुत आक्रामक हो गई थी और उसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गमलों, चप्पलों, जूतों और पत्थरों से हमला किया। ड्यूटी के दौरान उन्हें दिया गया हेलमेट पूरी तरह चकनाचूर हो गया था। अगर हेलमेट को भेदने के बाद पत्थर उनके सिर पर लगता, तो शायद आज वो जिंदा न होते। यह सोचकर आज भी मुझे डर लगता है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में करीब 148 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शनस्थल से कई वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें घायल पुलिसकर्मियों को देखा जा सकता था।
बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि सीसीटीवी फुटेज से पहचाने गए प्रदर्शनकारियों में से 989 का आपराधिक इतिहास पाया गया है। इन पर हत्या, डकैती, लूट, यौन उत्पीडऩ, अपहरण और अन्य अपराधों के मामले शामिल हैं।








