लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय सम्मान कानून के दायरे में लाने का रास्ता साफ, राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू होगा कानून
नई दिल्ली 30 जुलाई (आरएनएस)। संसद ने राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को अब लोकसभा ने भी स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा। इसके तहत पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के दायरे में शामिल किया जाएगा।
संशोधन के बाद यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ या राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा उत्पन्न करता है या इनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ अधिकतम तीन वर्ष के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान होगा।
सरकार का कहना है कि अब तक 1971 के कानून में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के सम्मान की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान थे, लेकिन राष्ट्रगीत के संबंध में ऐसा कोई स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान नहीं था। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया गया है।
सरकार ने इस संशोधन के पीछे संविधान सभा की उस ऐतिहासिक घोषणा का भी उल्लेख किया है, जिसमें 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होगा।
इससे पहले गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय गान और राष्ट्रगीत के गायन एवं वादन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। निर्देशों के अनुसार, यदि किसी कार्यक्रम में दोनों प्रस्तुत किए जाएं तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही अधिकृत शब्दों, सही उच्चारण और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा।
वर्ष 2025 में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के बाद इसके सम्मान और संरक्षण को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय सम्मान कानून के दायरे में लाने का निर्णय लिया।
’वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और आजादी के संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बना और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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