नईदिल्ली,(आरएनएस)। नीट पेपर लीक के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगातार गलतियों का सिलसिला इसी तरह जारी नहीं रह सकता। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र से कहा कि वे इस मामले पर बहुत बारीकी से नजर रखेंगे और नियमित रूप से इसकी समीक्षा करेंगे। पीठ ने कहा, हम सुनिश्चित करेंगे कि सब कुछ एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत हो।कोर्ट ने केंद्र सरकार से नीट-यूजी परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित परीक्षा की ओर बढऩे की योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी। पीठ ने कहा, अगर परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की जाती है तो डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। कृपया हमें बताएं कि आप पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में जाने के लिए क्या कर रहे हैं। कृपया बताएं कि कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में जाने पर आप डेटा की सुरक्षा कैसे करेंगे।
सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार किए जाएंगे।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, प्रिंटिंग से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया कोर्ट के सामने रखी जाएगी। राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू किया जा रहा है और कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी एक हलफनामे में दी जाएगी।
मामले पर अगली सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी
कोर्ट ने केंद्र से कहा, आपको 3 चरण में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना है- परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद। हमें परीक्षा को संस्थागत बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने राधाकृष्णन पैनल के उस सुझाव पर भी एनटीए की राय मांगी, जिसमें हाइब्रिड फॉर्मेट अपनाने की बात कही गई है। इसके तहत प्रश्न-पत्र एन्क्रिप्टेड लिंक के जरिए डिजिटल रूप से भेजे जाएंगे और परीक्षा से सिर्फ 30-60 मिनट पहले प्रिंट किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए को निर्देश दिया कि वे नीट-यूजी पेपर लीक के बाद सुधार लागू करने की दिशा में हुई प्रगति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को प्रस्तावित गवर्निंग बोर्ड, विशेषज्ञों की अगुवाई वाली इकाइयों और 10 अहम क्षेत्रों में उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने के बारे में भी जानकारी देने का निर्देश दिया। इन क्षेत्रों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, रिसर्च और डेवलपमेंट, पारदर्शिता और प्रशासन शामिल हैं।








