अमेरिका के 7वें हमले के दौर के बाद ईरान का पलटवार, अमेरिकी बेस और ड्रोन डिपो को बनाया निशाना

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध लगातार जारी है. इसी सिलसिले में अमेरिका ने लगातार सातवीं बार ईरान पर निशाना साधा. अमेरिका का इन हमलों के पीछे का उद्देश्य ईरान की सेनाओं की शक्तियों को कम करना है.
वहीं, जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी अमेरिका पर निशाना साधा. जानकारी के मुताबिक ईरान ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि उसने बदले की कार्रवाई करते हुए जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया है. ये हमले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के ईरानी ठिकानों पर लगातार सातवीं रात हमले की घोषणा के कुछ घंटों बाद किए गए. हमलों की पुष्टि ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग ने ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का हवाला देते हुए बयानों के जरिए की.
ईरानी सेना के बयान के अनुसार, देश की सेना ने ऑपरेशन लाइटनिंग का 14वां चरण पूरा किया, जिसमें कुवैत और जॉर्डन में कई अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए. बयान में कहा गया है कि ईरानी ड्रोन ने अल-उदैरी कैंप में एक गोला बारूद डिपो, कुवैत में अली अल-सलेम एयर बेस पर हेडक्वार्टर की इमारतों के साथ-साथ कई कम्युनिकेशन ब्रिज को निशाना बनाया गया. इसमें अल-उदैरी कैंप अमेरिकी सैनिकों के लिए एक अहम लॉजिस्टिक्स और फोर्स-सपोर्ट हब है, जबकि अली अल-सलेम एयर बेस को खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी एयर ऑपरेशन को सपोर्ट और कोऑर्डिनेट करने वाले सबसे बड़े सेंटर में से एक बताया गया.
ईरानी सेना ने आगे दावा किया कि इसी ऑपरेशन में जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर फ्यूल स्टोरेज टैंक पर हमला किया गया. इसमें बेस को एक जरूरी अमेरिकी मिलिट्री फैसिलिटी बताया गया, जिसका इस्तेमाल इसकी स्ट्रेटेजिक लोकेशन और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से रीजनल ऑपरेशन्स के लिए किया जाता है. इसके अलावा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (ढ्ढक्रत्रष्ट) ने अपनी 25वीं घोषणा में ऑपरेशन नस्र 2 की 17वीं लहर की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि इसने बहरीन में एक अमेरिकी ड्रोन डिपो को निशाना बनाया था.
ढ्ढक्रत्रष्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में एक अमेरिकी अनमैन्ड एरियल व्हीकल स्टोरेज फैसिलिटी को नष्ट कर दिया गया, बड़ी संख्या में ड्रोन में आग लगा दी गई और कहा गया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और दर्जनों ड्रोन ने बहरीन में मुख्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर पर हमला किया. आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले रात में अमेरिका के हमलों के जवाब में किए गए थे, जिसमें उसने दावा किया कि पुलों को निशाना बनाया गया और ईरान में आम लोगों की मौत हुई.
बयान में यह भी चेतावनी दी गई कि अगर अमेरिका ईरान के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करता रहा, तो तेहरान उन देशों में अमेरिकी कंपनियों से जुड़े बड़े इंडस्ट्रियल, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसेट्स को निशाना बनाएगा, जहां यूएस मिलिट्री बेस हैं. ईरान के हमले अमेरिकी सेना के ईरान के खिलाफ मिलिट्री हमलों का एक और दौर शुरू करने के कुछ घंटों बाद हुए हैं, जो लगातार सातवीं रात का ऑपरेशन है. वॉशिंगटन ने कहा कि इस कैंपेन का मकसद ईरान की मिलिट्री क्षमताओं को और कम करना है.
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने लिखा कि सेंटकॉम ने आज लगातार सातवीं रात 3 बजे (स्थानीय समयानुसार) पर ईरान के खिलाफ हमलों का एक राउंड शुरू किया. ये हमले कमांडर इन चीफ के निर्देश पर ईरानी मिलिट्री क्षमताओं को कमजोर करने के लिए किए गए हैं. यह नया ऑपरेशन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी के बीच हुआ है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच 14-सूत्रीय समझौता खत्म हो गया है, और हाल के दिनों में दोनों देशों ने मिलिट्री हमले किए हैं.

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