संविधान संशोधन बिल पर डीएमके के बदले सुर, परिसीमन पर आश्वासन मिला तो समर्थन के संकेत

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लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) और वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार को अहम राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम  ने संकेत दिए हैं कि यदि दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा की स्पष्ट गारंटी दी जाती है, तो पार्टी इस मुद्दे पर सरकार से बातचीत के लिए तैयार है।
परिसीमन पर आश्वासन की मांग
डीएमके के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार प्रत्येक राज्य की लोकसभा सीटों का हिस्सा पहले से स्पष्ट करे, ताकि तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार की कमी न आए। पार्टी का कहना है कि यदि निष्पक्ष व्यवस्था का भरोसा मिलता है तो वह अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, डीएमके ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर अभी तक सरकार के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
सरकार को मिल सकती है अतिरिक्त ताकत
डीएमके के बदले रुख से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन   की उम्मीदें बढ़ी हैं। इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी कह चुकी हैं कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि की जाती है तो उनकी पार्टी भी विधेयक का विरोध नहीं करेगी।
सरकार अब डीएमके, एनसीपी (शरद पवार गुट) के अलावा अन्य विपक्षी दलों और कुछ स्वतंत्र रुख वाले सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश में है, ताकि संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित किया जा सके।
बिल में संशोधन की संभावना
सूत्रों के अनुसार, सरकार विधेयक के मसौदे में कुछ बदलाव भी कर सकती है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस आश्वासन को शामिल किए जाने पर विचार हो रहा है, जिसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि की बात कही गई थी। इससे उन दलों और सांसदों का भरोसा जीतने की कोशिश होगी जो अभी इस मुद्दे पर असमंजस में हैं।
राज्यसभा में सरकार की स्थिति मजबूत
सरकारी सूत्रों का कहना है कि संसद के दोनों सदनों में पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित होने के बाद ही संविधान संशोधन विधेयक दोबारा पेश किया जाएगा। राज्यसभा में सरकार की स्थिति पहले से अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
डीएमके ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भी आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अब वह अपने राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेगी और किसी अन्य दल के रुख का इंतजार नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की रणनीति से विपक्षी गठबंधन को नुकसान हुआ है।
यदि यह संविधान संशोधन विधेयक पारित होता है, तो लोकसभा की सीटों के पुनर्निर्धारण का मार्ग प्रशस्त होगा और वर्ष 2029 से महिलाओं को लोकसभा एवं विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी

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