मेडिकल कॉलेज खोलने के नियमों में बड़ा बदलाव, अब किसी भी कंपनी को मिलेगी अनुमति

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देश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन   ने मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत अब कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत कोई भी कंपनी मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेगी। इससे पहले यह अनुमति केवल सेक्शन-8 (गैर-लाभकारी) कंपनियों तक सीमित थी।
अब तक केवल गैर-लाभकारी संस्थाओं को ही मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की अनुमति थी। सेक्शन-8 कंपनियां अपने लाभ को संस्थान के विकास या सामाजिक कार्यों में ही खर्च कर सकती थीं। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद लाभ कमाने वाली कंपनियां भी निर्धारित मानकों का पालन करते हुए मेडिकल कॉलेज शुरू कर सकेंगी।
=सरकार ने बताई बदलाव की वजह
सरकार का मानना है कि गैर-लाभकारी शर्त के कारण कई बड़े कॉर्पोरेट समूह मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने से बच रहे थे। साथ ही, अनौपचारिक रूप से मुनाफा कमाने की शिकायतें भी सामने आती थीं। सरकार का तर्क है कि कानूनी व्यवस्था बनने से निवेश बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी और कर (टैक्स) राजस्व में भी वृद्धि होगी।
पहले भी बदले थे नियम
वर्ष 2017 में तत्कालीन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया  ने सभी पंजीकृत कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति दी थी। हालांकि, 2019 में रूष्टढ्ढ की जगह   बनने के बाद नियम सख्त कर दिए गए और केवल सेक्शन-8 कंपनियों को ही अनुमति दी गई। अब हृरूष्ट ने फिर से नियमों में संशोधन कर दायरा बढ़ा दिया है।
फीस को लेकर बढ़ सकती है बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, लेकिन छात्रों पर बढ़ती फीस का बोझ भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र के पालघर स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज की प्रबंधन कोटा फीस 2025 में 15.7 लाख रुपये तक पहुंच चुकी थी।
सुप्रीम कोर्ट का रहा है स्पष्ट रुख
सुप्रीम कोर्ट अपने पूर्व के कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, न कि मुनाफा कमाने का व्यवसाय। अदालत ने संस्थानों को केवल विकास और विस्तार के लिए सीमित अधिशेष (सरप्लस) रखने की अनुमति दी है। ऐसे में नए नियमों के बाद मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और फीस नियंत्रण जैसे मुद्दों पर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही

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