बाथरूम में मिले 40 हजार रुपये से खुला राम मंदिर दान चोरी का राज, 80 लाख नकद बरामद, 8 आरोपी गिरफ्तार

Join Us

अयोध्या, (आरएनएस)। अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गबन का सनसनीखेज मामला बाथरूम में छिपाकर रखे गए 40 हजार रुपये मिलने से उजागर हुआ। मंदिर के एक सुरक्षा गार्ड को परिसर के शौचालय में संदिग्ध परिस्थितियों में नगदी मिली, जिसके बाद उसने इसकी सूचना मंदिर प्रबंधन को दी। इसी सूचना के आधार पर शुरू हुई जांच ने एक सुनियोजित दान चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।मंदिर प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दान गिनती केंद्र की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई। लगभग 40 दिनों की रिकॉर्डिंग खंगालने पर सामने आया कि दान की गिनती में लगे कुछ कर्मचारी व्यवस्थित तरीके से नोटों की चोरी कर रहे थे। जांच में पता चला कि कर्मचारियों ने कम से कम 70 बार दान की राशि में कथित रूप से सेंध लगाई।जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी दान की गिनती करते समय नोटों को जूतों, कपड़ों या अन्य स्थानों पर छिपा लेते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए गिरोह का एक सदस्य कैमरे के सामने खड़ा होकर दृश्य को बाधित करता था, जबकि दूसरा कर्मचारी नकदी छिपाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार, चोरी की गई रकम को पहले मंदिर परिसर के शौचालयों में छिपाकर रखा जाता था।

बाद में अलग-अलग समय पर थोड़ी-थोड़ी राशि बाहर निकाली जाती थी ताकि किसी को संदेह न हो। इसके बाद मंदिर परिसर से बाहर किसी स्थान पर चोरी की रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था।
जांच में गिरफ्तार किए गए आरोपी अविनाश शुक्ला की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार कथित रूप से दान की राशि चुराते हुए दिखाई दिया है।
पुलिस ने अब तक इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से लगभग 80 लाख रुपये नकद, गहने तथा एक वाहन बरामद किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वाहन चोरी किए गए दान के पैसों से खरीदा गया था।
मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच कर रही है। इसके अलावा आरोपियों एवं उनके रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे गए मकानों और अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दान की राशि का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह चोरी किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से काम करने वाले गिरोह का परिणाम थी। पुलिस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

Previous articleसोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन, डॉक्टरों ने अंग फेल होने की चेतावनी दी