नई दिल्ली ,(आरएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (क्कश्य) में पाकिस्तानी सेना का क्रूर और अमानवीय चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। मंगलवार तडक़े पाकिस्तानी फौज और सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के स्थानीय निहत्थे नागरिकों पर अचानक बड़ी हिंसक कार्रवाई कर दी। इस अंधी गोलीबारी और बर्बरता में कम से कम 6 बेगुनाह नागरिकों की बेरहमी से जान ले ली गई है। पाकिस्तानी सेना के इस खूनी खेल और जुल्म के बाद पूरे इलाके में भयंकर आक्रोश फैल गया है और हालात अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं।सुबह-सुबह फौज ने बोला धावा, मच गई चीख-पुकारस्थानीय सूत्रों और मिली जानकारी के मुताबिक, आज सुबह-सुबह जब लोग अपने रोजमर्रा के कामों की शुरुआत कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नागरिकों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। देखते ही देखते फौजियों ने निहत्थे और शांतिपूर्ण लोगों पर भारी बल प्रयोग किया ।
और उन पर अंधाधुंध सीधी फायरिंग खोल दी। सेना के इस अचानक हुए भीषण हमले से पूरे इलाके में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन कई बेकसूर लोग पाकिस्तानी गोलियों की चपेट में आ गए।रावलकोट और सुधनोती में बिछीं लाशें, इन लोगों ने गंवाई जान
पाकिस्तानी सेना की इस हिंसक और कायराना कार्रवाई में अब तक 6 नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। इस नरसंहार में मारे गए कुछ लोगों की पहचान भी सामने आ गई है। बताया जा रहा है कि मटियाल मीरा बस टर्मिनल (रावलकोट) के पास हुई भारी हिंसा में वाजिद हयात नाम के एक आम नागरिक की जान चली गई। वहीं, बलोच (सुधनोती) इलाके में फौज द्वारा की गई अंधी गोलीबारी में जाहिद मुगल, जफर मुगल और अर्सलान अकबर सहित कई अन्य निर्दोष नागरिकों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने मौत के घाट उतार दिया।
जुल्म के खिलाफ सडक़ों पर उतरे लोग, पाकिस्तानी हुकूमत पर फूटा गुस्सा
इस भीषण नरसंहार की खबर फैलते ही पूरे पीओजेके (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर) में भारी तनाव और मातम का माहौल छा गया है। बिना किसी ठोस कारण या चेतावनी के सीधे आम नागरिकों के सीने में गोलियां उतारने की इस हिंसक घटना को लेकर स्थानीय लोगों का सब्र अब टूट चुका है। पाकिस्तानी हुकूमत और उसकी क्रूर सेना के खिलाफ लोगों में अभूतपूर्व गुस्सा उबल पड़ा है और लोग सडक़ों पर उतर आए हैं। मौके पर मौजूद चश्मदीदों का साफ तौर पर कहना है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के सीधे नागरिकों को अपना निशाना बनाया, जो पाकिस्तान के तानाशाही और दमनकारी रवैये का सबसे खौफनाक सबूत है।








