महंगाई की मार से महंगी हुई थाली, टमाटर-तेल और चिकन के बढ़े दामों का असर

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नई दिल्ली (ए.)। देश में बढ़ती महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। ईंधन से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम बढऩे के बीच जून महीने में चीनी, वनस्पति तेल और सब्जियों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। अब इसका सीधा असर लोगों की खाने की थाली पर दिखाई दे रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, टमाटर और ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण वेज और नॉनवेज दोनों थाली महंगी हो गई हैं। सब्जियों के बढ़ते दाम जहां शाकाहारी भोजन की लागत बढ़ा रहे हैं, वहीं चिकन की कीमतों में उछाल से नॉनवेज थाली पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मासिक ‘रोटी-राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 की तुलना में जून 2026 में टमाटर की कीमतों में 31 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में 32 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला टमाटर जून 2026 में बढक़र 42 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। टमाटर के बढ़ते दामों का सीधा असर आम लोगों की रसोई और खाने की थाली पर पड़ा है। सब्जियों की लागत बढऩे से शाकाहारी थाली महंगी हुई है, वहीं खाद्य महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है।
सब्जियों की बढ़ती कीमतों से महंगी हुई थाली, वेज और नॉन-वेज दोनों पर असर
टमाटर की कीमतों में महीने-दर-महीने करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा आलू के दाम में 5 फीसदी और प्याज की कीमतों में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है। सब्जियों की कीमतों में इस तेजी का सीधा असर खाने की थाली की लागत पर पड़ा है।रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 5 फीसदी बढ़ी है, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मासिक आधार पर भी महंगाई का असर देखने को मिला है। जून में शाकाहारी थाली की लागत में 4 फीसदी और मांसाहारी थाली की कीमत में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।सब्जियों और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों के साथ अब ब्रॉयलर चिकन भी महंगा हो गया है।
नॉन-वेज थाली की कुल लागत में चिकन की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी होती है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर थाली की लागत पर पड़ता है।रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते नॉन-वेज थाली की लागत बढ़ी है और उपभोक्ताओं को अब खाने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
गर्मी और कमजोर सप्लाई से बढ़े टमाटर और चिकन के दाम
टमाटर और चिकन की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। बढ़ती गर्मी के कारण मुर्गियों की मृत्यु दर में इजाफा हुआ, वहीं उनका वजन भी सामान्य गति से नहीं बढ़ पाया। इसके अलावा नए चूजों की उपलब्धता कम होने से ब्रॉयलर चिकन की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर कीमतों पर पड़ा।टमाटर की बात करें तो अधिक तापमान और प्री-मानसून बारिश में कमी के कारण उत्पादन में गिरावट आई है। इससे बाजार में इसकी उपलब्धता कम हुई और कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन लागत भी बढ़ी है, जिससे सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं के दामों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

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